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Amethi News: प्रकृति ही मनुष्य की सर्वोत्तम गुरु

Tue, 09 Dec 2025 01:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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अमेठी के टेंगहा में कथा सुनते श्रद्धालु। स्त्रोत : आयोजक
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संग्रामपुर। प्रकृति ही सर्वोत्तम गुरु है जो निरंतर मनुष्य को सीख देती है। ये बातें ठेंगहा में श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन सोमवार को प्रवाचक आचार्य पंडित शिवशंकर त्रिपाठी ने यदुवंश का वर्णन, दत्तात्रेय भगवान के 24 गुरु, सुदामा प्रसंग, भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन और परीक्षित मोक्ष प्रसंग की कथा सुनाते हुए कहीं।
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प्रवाचक ने शुरुआत यदुवंश वर्णन से करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के कुल, वंश, धर्म और उनके वंशजों की विशिष्ट भूमिकाओं को सरल और भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं आकाश, पृथ्वी, पानी, अग्नि, वायु, चांद, सूरज, कबूतर, सर्प, मधुमक्खी, नदी आदि से मिलने वाली जीवन शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति ही सर्वोत्तम गुरु है जो निरंतर मानव को सीख देती है।


प्रवाचक ने बताया कि दान और पुण्य के बाद भी यदि अहंकार में किया गया छोटा सा अपराध रह जाए तो उसका फल अवश्य भोगना पड़ता है। गरीब ब्राह्मण सुदामा की मित्रता, निष्कपट प्रेम और श्रीकृष्ण की सेवा का वर्णन किया। बिना कहे श्रीकृष्ण ने सुदामा को राजसी वैभव प्रदान कर दिया। समापन पर उन्होंने परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई। प्रवाचक ने कहा कि भागवत कथा का सार यही है कि भक्ति, सेवा, सत्य और सद्कर्म ही मोक्ष का मार्ग है। इस अवसर पर जगदीश नारायण अग्रहरि, हुकुम चंद्र, यज्ञ नारायण तिवारी, रघुनाथ पांडेय, लक्ष्मीकांत, पुष्पराज सिंह, गायत्री प्रसाद, रामलखन, बजरंग प्रसाद, चित्रकूट मणि, राधेश्याम तिवारी, महादेव बरनवाल आदि मौजूद रहे।
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