मुसाफिरखाना (अमेठी)। बेसहारा गो-वंशों को संरक्षित करने के लिए तहसील क्षेत्र के नेवादा किशुनगढ़ स्थित वृहद गो-आश्रय केंद्र अव्यवस्था का शिकार हो गया है। आलम यह है कि यहां गो-वंशों की देख-रेख के लिए तैनात 13 लोगों को मानदेय नहीं मिल रहा तो बाउंड्रीवॉल नहीं होने से संरक्षित गो-वंश लगातार एक ही स्थान पर बंधे हुए हैं।
तहसील क्षेत्र के नेवादा किशुनगढ़ स्थित जिले का इकलौता वृहद गो-आश्रय केंद्र अव्यवस्था से जूझ रहा है। एक करोड़ 20 लाख की लागत से बनने वाले इस केंद्र का लोकार्पण केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पिछले 22 जून को किया था। तब से गो-आश्रय केेंद्र पर करीब 220 गो-वंश संरक्षित किए गए हैं। केंद्र पर बाउंड्रीवॉल नहीं होने के चलते संरक्षित गो-वंशों के गले में पड़ा रस्सी का फंदा अंतिम सांस के बाद ही निकलता है।
शासन से मिल रही धनराशि केंद्र पर संरक्षित गो-वंशों की संख्या के अनुपात में बहुत कम होने के चलते वहां की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। आठ महीने से रख रखाव में लगे 13 लोगों को मानदेय भी नहीं मिला रहा है। एक स्थान पर बंधे गो-वंशों को दिन में पानी पिलाने के समय कुछ दूर चलने का मौका जरूर मिल जाता है। महीनों से एक ही स्थान पर बंधे रहने तथा घूमने फिरने की आजादी न होने पर जानवरों को पैर की बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं धन की आ रही कमी के बीच कोई स्वयंसेवी संस्था भी मदद को तैयार नहीं है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश चंद्र पाठक की मानें तो केंद्र पर किसी प्रकार की समस्या नहीं है। हालांकि वह 30 रुपये में प्रति दिन जानवरों को चारा खिलाए जाने के सवाल पर कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।