जामों (अमेठी)। कलयुग में भगवान श्रीराम के नाम का स्मरण करने मात्र से ही मानव जीवन सुखमय हो जाता है। इसके साथ ही सारे पापों से आसानी से मुक्ति मिल जाती है। ये बातें कस्बे में आयोजित सात दिवसीय श्री रामकथा के छठे दिन प्रवाचक पंडित राजेश निर्मोही महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि मनुष्य को कभी घमंड नहीं करना चाहिए, यही सारे पाप की जड़ है। भगवान श्रीराम के विचार एवं चरित्र का अनुसरण करने से ही परिवार में एकजुटता आने के साथ सुख-समृद्धि आती है। भगवान राम ने सारा जीवन परिवार एवं समाज की सेवा करने में लगा दिया। प्रवाचक ने अहिल्या उद्धार, जनकपुरी में श्री राम का प्रवेश, पुष्प वाटिका एवं विवाह का वर्णन करके श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
प्रवाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवनकाल में बिना गुरु का आदेश लिए कोई काम नहीं किया। भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण के जनकपुरी में प्रवेश करने की कथा सुनाकर श्रोताओं को भक्तिभाव में सराबोर कर दिया। इस मौके पर मुख्य यजमान धर्मराज मिश्र, रामकृपाल सोनी, उदयराज शुक्ल, ललित अग्रहरि, बबलू पांडेय आदि मौजूद रहे।