मुसाफिरखाना कस्बे में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत : स्थानीय
मुसाफिरखाना। गांधी पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन उज्जैन के महामृत्युंजय धाम के पीठाधीश्वर प्रणवपुरी महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, तप और संकल्प का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा से की गई भक्ति मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देती है। भगवान की भक्ति के साथ अच्छे कर्म को जीवन का आधार बनाना चाहिए।
ध्रुव चरित्र प्रसंग की कथा सुनाते हुए प्रवाचक ने बताया कि उपेक्षा से आहत बालक ध्रुव ने निराश होने के बजाय भगवान की भक्ति का मार्ग चुना। नारद मुनि के मार्गदर्शन में तपस्या कर उन्होंने भगवान विष्णु को प्रसन्न किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कहा कि मनुष्य को जीवन में सुख-दुख दोनों परिस्थितियों में भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए।
प्रवाचक ने कहा कि मन में श्रद्धा और कर्म में ईमानदारी हो तो जीवन की दिशा बदल सकती है। कहा कि विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना और ईश्वर पर विश्वास रखना जरूरी है। ध्रुव का जीवन बताता है कि दृढ़ संकल्प और भक्ति से मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। कथा में मुख्य यजमान रामचंद्र द्विवेदी, विवेक मिश्रा, दिवाकर द्विवेदी, रामकिंकर मिश्र, बब्बन पांडेय और विजय बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।