अमेठी सिटी। आदि काव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती बृहस्पतिवार को जिले में धूमधाम से मनाई गई। मंदिरों में रामायण पाठ के साथ धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए तो जगह-जगह यज्ञ, भंडारा भी हुआ।
गौरीगंज के हनुमान मंदिर गढ़ामाफी, मुसाफिरखाना के रामजानकी मंदिर, कमरौली स्थित राम मंदिर, भादर के रामगंज स्थित हनुमान मंदिर, अमेठी स्थित देवीपाटन व तिलोई स्थित हनुमानगढ़ी सहित अन्य श्रीराम व हनुमान के मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण के साथ ही रामायण का पाठ हुआ। शहर व गांवों के श्रीराम, हनुमानजी के मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण के साथ रामायण का पाठ हुआ।
कार्यक्रम में नोडल अफसरों ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन व उनकी रचनाओं के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए रामायण महाकाव्य के बारे में बताया। डीएम निशा अनंत ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि विश्व के आदि कवि हैं। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध कालजयी कृति रामायण महाकाव्य की रचना श्रीराम के जीवनकाल में की। महर्षि वाल्मीकि की ओर रचित रामायण विश्व के आदि ग्रंथ के रूप में आज भी पूजनीय है, जो व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्रीय मूल्यों के निर्माण में वैश्विक स्तर पर मार्गदर्शन का आधार है।
महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण सामाजिक मूल्यों, मानव मूल्यों एवं राष्ट्र मूल्यों की स्थापना का आदर्श है। कहा कि वाल्मीकि रामायण में निहित मानव मूल्यों, सामाजिक मूल्यों व राष्ट्र मूल्यों के व्यापक प्रचार-प्रसार व जन सामान्य को इससे जोड़ने के लिए महर्षि वाल्मीकि से संबंधित मंदिरों शासन के निर्देशानुसार कार्यक्रम आयोजित कर उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया है।