अमेठी सिटी। शारदीय नवरात्र पर पूरे नौ दिन मां जगदंबा का दरबार सजेगा। पूजा पंडालों व देवी मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान होंगे। मां दुर्गा की महिमा के जयकारे गूंजेंगे। इस बार मां जगदंबा पालकी पर विराजमान होकर आएंगी। श्रद्धालु पूरे नौ दिन तक माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करेंगे। मंदिरों व पूजा पंडालाें में तैयारियों को अंतिम रूप देने में आयोजक जुटे रहे।
पंडित हेमंतदास महाराज ने बताया कि शारदीय नवरात्र बृहस्पतिवार से शुरू है और पूरे नौ दिन मां जगदंबा का दरबार सजेगा। प्रतिपदा पर हस्त नक्षत्र दोपहर 3:20 बजे तक, इसके पश्चात चित्रा नक्षत्र रहेगा। कलश स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है। बृहस्पतिवार को आश्विन घट स्थापना मुहूर्त सुबह 6:15 से सुबह 7:24 बजे तक है और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:27 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक है। इन मुहूर्त में कलश स्थापना कर माता की पूजा करना शुभ है।
कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
आचार्य कपिल देव मिश्र ने बताया कि कलश स्थापना के लिए सात तरह के अनाज, चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन, पवित्र स्थान से लाई गई मिट्टी, कलश, गंगाजल, आम व अशोक के पत्ते का पल्लव, सुपाड़ी, जटा वाला नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, पुष्प, लाल चुनरी, मौली, दीपक, घी, धूप, नारियल, फूल, पान, लौंग, इलाइची, मिश्री, कपूर, शहद, दही, फल व फूल का प्रयोग किया जाता है।
ये है कलश स्थापना की विधि
उत्तर-पूर्व दिशा को साफ कर मां की चौकी लगाएं। इसपर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाकर देवी मां की मूर्ति स्थापित करें। प्रथम पूज्य गणेशजी का ध्यान कर कलश स्थापित करना चाहिए। एक नारियल में चुनरी लपेट कर कलश के मुख पर मौली बांध जल भरकर उसमें एक लौंग का जोड़ा, सुपारी, हल्दी की गांठ, दुर्वा, कुश, सतावर, गंगाजल, और द्रव्य डालने के बाद आम का पल्लव लगाकर उसपर नारियल रखें। कलश को दुर्गा प्रतिमा की दाईं ओर स्थापित करना चाहिए।
नवरात्र की पूजा विधि
सुबह नित्य कर्म और स्नान के बाद शरीर पर गंगा जल छिड़कें। कलश स्थापना के स्थान पर दीया जलाएं और दुर्गा मां को अर्घ्य दें। इसके बाद अक्षत, सिंदूर, लाल फूल, फल व मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद धूप, अगरबत्ती जलाकर दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ और आरती करते हुए क्षमा याचना करनी चाहिए।