इन्हौना (अमेठी)। सिंहपुर ब्लॉक क्षेत्र के दूबेपुर में शुरू हुई सात दिवसीय श्रीराम कथा के पहले दिन आचार्य रमाकांत शास्त्री ने गुरु की महिमा का बखान किया। बताया कि गुरु के बिना जीवन अधूरा होता है। गुरु शब्द संस्कृत के गु (अंधकार) और रु (प्रकाश) से मिलकर बना है। जिसका अर्थ होता है, अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला।
कथावाचक ने कहा कि गुरु वह व्यक्ति है, जो अपने ज्ञान, अनुभव और शिक्षा के माध्यम से शिष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और भ्रम से सत्य की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है। गुरु न केवल हमारी भौतिक शिक्षा का पालन करता है, बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक विकास में भी हमारी मदद करता है।
भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि गुरु की शिक्षा का अनुसरण कर जीवन को सही दिशा में लाया जा सकता है। गुरु नानक देवजी ने भी यह बताया है कि गुरु से प्राप्त ज्ञान ही मानव जीवन को सही दिशा दे सकता है। कथा में शिवाकांत शास्त्री, श्रीकांत त्रिपाठी, रामपाल, मनोज कुमार, विनोद कुमार, बाबूलाल तिवारी, ऋषि शुक्ला, प्रदीप तिवारी, अभिषेक तिवारी आदि मौजूद रहे।