गौरीगंज के बरनाटीकर वार्ड में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।-स्रोत : आयोजक
अमेठी सिटी। श्रीमद्भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है। इसके श्रवण मात्र से हरि हृदय में आ विराजते हैं। ब्रह्म सत्य है, जबकि जगत मिथ्या है। ये बातें गौरीगंज के बरनाटीकर वार्ड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन मंगलवार को प्रवाचक विनय शुक्ल महाराज ने श्रीकृष्णा-सुदामा प्रसंग की कथा सुनाते हुए कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि जीवन की महान सच्चाई मौत है, कोई भी जीव इससे बच नहीं सका है। संसार में जो भी जीव आता है, उसे अवश्य जाना पड़ता है। आवागमन ही संसार की रीति है। उन्होंने बताया कि जिस काम के लिए जीव धरती पर आया है, वह उस काम को करना ही भूल गया है। उन्होंने बताया कि सत्संग व भगवान की शरण में जाकर ही जीवन सुधारा जा सकता है, ताकि जीवात्मा मुक्त होकर परमात्मा के चरणों को प्राप्त कर सके।
प्रवाचक ने कहा कि महर्षि वेद व्यास ने संक्षेप में भागवत पुराण के स्थान, विषय और महत्व का वर्णन किया है। यह पुराण हिंदू धर्म के आधारभूत ग्रंथों में से एक है और इसमें भगवान विष्णु के अवतारों की कथाएं विस्तार से प्रस्तुत हैं। इस अवसर पर मुख्य यजमान नागेश्वर प्रसाद शुक्ल, हरिश्चंद्र तिवारी आदि मौजूद रहे।