मुसाफिरखाना कस्बे में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक
मुसाफिरखाना। गांधी पार्क में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन शुक्रवार को उज्जैन के महामृत्युंजय धाम के पीठाधीश्वर प्रणवपुरी महाराज ने श्रद्धालुओं को परोपकार, सदाचार और सेवा का महत्व समझाया। कहा कि इससे व्यक्ति का जीवन सार्थक होता है।
प्रवाचक ने कहा कि मनुष्य के जीवन की सार्थकता केवल अपने लिए सुख-सुविधाएं जुटाने में नहीं, बल्कि दूसरों के काम आने में भी है। धन और प्रतिष्ठा समय के साथ बदल सकते हैं मगर व्यक्ति के अच्छे कर्म और उसका व्यवहार लोगों के मन में लंबे समय तक बने रहते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को अपने आचरण में विनम्रता रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन में करुणा, प्रेम और परहित की भावना अपनाना भी जरूरी है। किसी जरूरतमंद की सहायता करना, दुखी व्यक्ति को सहारा देना और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखना सदाचार के ऐसे रूप हैं, जिन्हें हर व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में अपना सकता है। परिवार में आपसी सम्मान और समाज में सद्भाव भी इन्हीं मूल्यों से मजबूत होता है। कथा के अंतिम दिन मुख्य यजमान रामचंद्र द्विवेदी, विवेक दुबे, दिवाकर द्विवेदी, रामकिंकर मिश्र, बब्बन पांडेय और विजय बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।