गौरीगंज (अमेठी)। औद्योगिक क्षेत्र उतेलवा में परिषदीय शिक्षक व प्रधान प्रतिनिधि द्वारा बंजर भूमि बेच डालने के मामले में मिलीभगत की पुष्टि होने के बाद एसडीएम मुसाफिरखाना ने हलका लेखपाल को निलंबित कर दिया है। निलंबित लेखपाल की विभागीय जांच तहसीलदार मुसाफिरखाना संगीता पांडेय को दी गई है।
गत 18 मार्च को मुसाफिरखाना में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में उतेलवा निवासी मनोज कुमार शुक्ल ने डीएम राकेश कुमार मिश्र से अपने गांव के प्रधान प्रतिनिधि व बाजार शुकुल के पूर्व माध्यमिक विद्यालय किशनी के शिक्षक राघवेंद्र तिवारी पर बंजर भूमि बेच डालने का आरोप लगाया था। कहा था कि राघवेंद्र ने यह बंजर भूमि करीब नौ साल पहले ली गई एक जमीन (इस भूमि को 29 जनवरी 2015 को उतेलवा के ही रामचंद्र को बेच दिया था) की आड़ में बेच रहा है। अब तक लखनऊ-वाराणसी हाईवे की कई बिस्वा बंजर भूमि बेचने के अलावा कुछ भू-भाग पर अपने चचेरे भाई व रिश्तेदार का भी मकान बनवा रहा है।
डीएम ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राम केवल त्रिपाठी से मामले की विस्तृत जांच कराई तो आरोप सही निकले। बंजर जमीन बेचने के मामले में जांच अधिकारी ने राघवेंद्र व उनके दो चचेरे भाई के अलावा उतलेवा के लेखपाल शिवकुमार को भी दोषी पाया। जांच रिपोर्ट में त्रिपाठी ने अन्य लोगों पर केस दर्ज कराने के साथ अन्य कड़ी विधिक कार्रवाई करने के साथ लेखपाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की थी। जांच अधिकारी की संस्तुति पर एसडीएम मुसाफिरखाना सविता यादव ने लेखपाल को निलंबित करते हुए विभागीय जांच का आदेश दिया है।