अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ में चल रही प्रज्ञा पुराण कथा के तीसरे दिन आचार्य कैलाशनाथ तिवारी ने समाज और परिवार में बढ़ते तनाव पर विस्तार से विचार रखे। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि भौतिक संसाधनों में वृद्धि हुई है, फिर भी जीवन में संतोष घटता दिख रहा है। परिवारों में संवाद कम हो रहा है और छोटी बातों पर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। सास-बहू, देवरानी-जेठानी और भाइयों के संबंधों में खिंचाव अब सामान्य स्थिति बनती जा रही है। इसके पीछे ईर्ष्या, लोभ, मोह, अहंकार जैसे दोष प्रमुख कारण हैं, जो संबंधों की मजबूती को कमजोर करते हैं। इससे रिश्ते बिगड़ रहे हैं।
आचार्य ने पर्यावरण के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग संतुलन बिगाड़ रहा है। पेड़ों की कटाई और नदियों का प्रदूषण भविष्य के लिए गंभीर संकेत हैं। कोरोना काल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की कमी ने पूरी दुनिया को सचेत किया था।
कथा में नारद मुनि और भगवान विष्णु के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कुविचार ही समस्याओं की जड़ हैं। जैसा विचार होता है, वैसा ही कर्म और परिणाम सामने आता है। सकारात्मक सोच और व्यवहार अपनाने से जीवन में संतुलन स्थापित हो सकता है। प्रातः 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुति दी। कथा से पूर्व आचार्य और संगीत टोली का तिलक व माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।