अमेठी सिटी। 15 सितंबर को प्रसव के दौरान तबीयत खराब होने पर रेफर करने व रास्ते में प्रसूता की मौत के मामले में चार माह में टीम ने अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौपी। जांच टीम की ओर में लगातार ऑपरेशन में शामिल निश्चेतक के बयान नहीं कराने व संचालक के जवाब से संतुष्ट नहीं होने के साथ उपचार में लापरवाही बरतने की पुष्टि की। रिपोर्ट मिलने के बाद सीएमओ ने जनता अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करते हुए संचालन करने की दशा में कार्रवाई की चेतावनी दी है। पूरे पहलवान गांव निवासी सुमन को प्रसव के लिए 15 सितंबर को जनता हाॅस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन से प्रसव कराया गया। आरोप है कि ऑपरेशन के कुछ देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद लखनऊ रेफर कर दिया गया। लखनऊ में अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने के बाद अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगा पुलिस थाने मेंं शिकायत की। मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के संज्ञान लिया।
डिप्टी सीएम के निर्देश पर सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद, डिप्टी सीएमओ डॉ. पीके उपाध्याय और जिला अस्पताल के स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. विजय गुप्ता की टीम ने जांच की। जांच में मिली कमियों के आधार पर रिपोर्ट अस्पताल का लाइसेंस 25 सितंबर को निरस्त करते हुए संचालक व ऑपरेशन में शामिल डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा गया। नोटिस के बाद डॉ. शैलेंद्र कुमार जायसवाल ने जवाब दिया लेकिन निश्चेतक डॉ रजनीकांत ने जवाब नहीं दिया। टीम ने जांच में ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरतने की पुष्टि कर रिपोर्ट सीएमओ को दी। रिपोर्ट पर सीएमओ ने अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया।
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि टीम की रिपोर्ट के आधार पर जनता हाॅस्पिटल मुसाफिरखाना का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। संचालक को अस्पताल संचालन नहीं करने की बात कह गई है। यदि संचालक अस्पताल का संचालन करता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
टीम को जांच मिली कमियां
- 15 सितंबर की सुबह 10 बजे प्रसव के लिए प्रसूता को भर्ती किया गया। ऑनकाल चिकित्सक एमबीबीएस डीजीओ डॉ. शैलेंद्र कुमार जायसवाल ने मरीज का ऑपरेशन किया। इसके दो घंटे बाद ब्लीडिंग होने पर मरीज का उपचार किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से न कराके संचालक बीएएमएस चिकित्सक डॉ. संत कुमार तिवारी ने किया।
- मरीज के खून की जांच रिपोर्ट के अनुसार उसका ब्लड ग्रुप बी निगेटिव था। यह बहुत दुर्लभ ब्लड ग्रुप है। मरीज के ऑपरेशन के पहले रक्त की व्यवस्था अस्पताल प्रशासन को करनी चाहिए लेकिन, वह नहीं की गई। ओटी में प्री एंड पोस्ट एनेस्थेटिक नोट्स बीएचटी पर दर्ज नहीं किया गया।
- जांच में पाया गया कि 15 सितंबर को मरीज का ब्लड प्रेशर दोपहर एक बजे से ही कम होना शुरू हो गया। तीन बजे तक मरीज का ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे कम होता गया। संचालक का कहना है कि मरीज को गंभीर अवस्था में चार बजे रेफर किया गया। उधर, भर्ती अभिलेख के मुताबिक मरीज को साढ़े चार बजे इंजेक्शन दिया गया। इसमें भी लापरवाही मिली है।