जामों (अमेठी)। इच्छाशक्ति हो तो सफलता दूर नहीं है। क्षेत्र का किसान पारंपरिक खेती करने के साथ मधुमक्खी पालन कर हर वर्ष लाखों रुपये की अतिरिक्त आमदनी कर रहा है। किसान ने बताया कि नवंबर से मई तक कुल 2.4 लाख रुपये की आय हो रही है।
विकास खंड के पूरे विंध्या दुबे मजरे गोगमऊ निवासी अनुरुद्ध यादव आज लोगों की प्रेरणा बने हुए हैं। उन्होंने वर्ष 2009 में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मधुमक्खी पालन का व्यवसाय शुरू किया। इसमें पारिवारिक सदस्य भी सहयोग कर रहे हैं। किसान अनुरुद्ध ने बताया कि 20 बॉक्स से शुरुआत की, अब वह बढ़कर 50 बॉक्स हो गए हैं, जिससे प्रति वर्ष आठ क्विंटल शहद का उत्पादन हो रहा है। शहद खरीदने लखनऊ से व्यापारी आते हैं, जिसकी कीमत 300 रुपये किलो मिलती है।
मधुमक्खी पालन का उपयुक्त समय नवंबर से शुरू होकर मई तक होता है। बताया कि उत्पादित शहद की बाजार में बड़ी मांग भी रहती है। मधुमक्खी पालन से किस्मत चमक गई है। शहद कई तरह की औषधियों में इस्तेमाल होने के साथ ही पोषक तत्वों की वजह से मधुमक्खी पालन कम लागत में मोटी कमाई देने वाला व्यवसाय है। मधुमक्खी पालन से किसानों को अच्छा मुनाफा हो जाता है, जिसके लिए ट्रेनिंग जरूरी है।
किसान ने बताया कि मधुमक्खी एक जीवित प्राणी है और अगर इसे पूरे साल इनको मेंटेन करना है तो अलग-अलग ऋतुओं और सीजन के हिसाब से इसे मैनेज करना पड़ता है। इसके अलावा मधुमक्खियों को किस टाइम पर किस तरह की फीडिंग करानी है, उसकी जानकारी होनी चाहिए। जबकि मधुमक्खियों को कैसे कीट पतंगों से या बीमारी से बचाना है उसकी जानकारी भी होनी चाहिए, ताकि संक्रमित जगह से बक्सों को किस तरह ट्रांसफर किया जा सके। इसके प्रशिक्षण के लिए लोग कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या से संपर्क कर सकते हैं।