जगदीशपुर। मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं, लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। ये बातें यूपीसीडा सेक्टर पांच में भागवत कथा के दूसरे दिन प्रवाचक पंडित यदुनाथ अवस्थी ने कहीं।
प्रवाचक ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा का वर्णन किया। कहा कि परीक्षित कलयुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है।
उन्होंने कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूरज की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति की। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। बताया कि भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है, वह हर किसी में बसता है। इस अवसर पर राजन गुप्ता, ऊषा गुप्ता, राजेंद्र तिवारी, पवन गुप्ता, विनीता गुप्ता, सोनू यज्ञसेनी, सुरेश यज्ञसेनी, प्रवीन गुप्ता, शरद गुप्ता आदि मौजूद रहे।