जगदीशपुर (अमेठी)। पैगंबर मोहम्मद साहब के खानदान को दीन ए इस्लाम को बचाने में शहीद कर दिया गया, जिनकी याद में गम के माह के रूप में मुहर्रम मनाया जाता है। मलावा गांव में बारह रोजा शहीदे आजम कांफ्रेंस के चौथे दिन सोमवार रात जामा मस्जिद परिसर में मुफ्ती अफजल हुसैन ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत की तकरीर में ये बातें कहीं। बताया कि हजरत इमाम हुसैन शहीद होकर भी दुनिया को शांति और अमन का पैगाम दे गए।
उन्होंने कहा कि कर्बला की जंग में भले ही हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीद हुए, लेकिन इस जंग ने हक और ईमान का झंडा बुलंद किया। उनका कहना था कि यजीद ये जंग जीतकर भी हार गया और हजरत इमाम हुसैन इस जंग में शहीद होकर दुनिया को शांति और अमन का पैगाम दे गए।
मुफ्ती ने बताया कि इस्लाम का कैलेंडर हिजरी और उसका पहला महीना मुहर्रम है। ये वह महीना है, जिसमें इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों, जिसमें परिवार के सदस्य भी शामिल थे, को करबला की जंग में शहीद कर दिया गया था।