जगदीशपुर के रानीगंज उपकेंद्र पर मरीज का इलाज करती एएनएम सविता चौरसिया। स्रोत: सोनम चौरसिया
अमेठी सिटी। कभी गांवों की महिलाएं प्रसव के लिए निजी अस्पतालों का रुख करती थीं। लेकिन अब जगदीशपुर ब्लॉक के रानीगंज उपकेंद्र की तस्वीर बदल चुकी है। इस बदलाव के पीछे एएनएम सविता चौरसिया की मेहनत और सेवाभाव की बड़ी भूमिका है।
उन्होंने अपने व्यवहार, समर्पण और चिकित्सा कौशल से महिलाओं का भरोसा जीता है। अयोध्या के धरमगंज निवासी सविता ने 1 जुलाई 2023 को रानीगंज पीएचसी में कार्यभार संभाला था। शुरुआत में उपकेंद्र पर बहुत कम महिलाएं आती थीं। सुविधाओं को लेकर लोगों में भरोसे की कमी थी। सविता ने हार नहीं मानी और गांव-गांव जाकर महिलाओं को जागरूक किया। उन्होंने सुरक्षित प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का महत्व समझाया। उनकी मेहनत का परिणाम यह रहा कि एक वर्ष में उन्होंने 1012 सुरक्षित प्रसव कराकर जिले में पहला स्थान प्राप्त किया। अब रानीगंज समेत करीब 30 गांवों की गर्भवती महिलाएं टीकाकरण, जांच और परामर्श के लिए उपकेंद्र पहुंच रही हैं।
महिलाओं का भरोसा जीता
सविता जरूरत पड़ने पर मरीजों की मदद अपने निजी संसाधनों से भी करती हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को सही समय पर इलाज और परामर्श मिल जाए तो कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। सविता का मानना है कि सेवा के क्षेत्र में संवेदनशीलता सबसे जरूरी है। आज सविता चौरसिया ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास और भरोसे की पहचान बन चुकी हैं।
गांव-गांव पहुंच रहीं सविता
सविता गांव भ्रमण और टीकाकरण अभियान के दौरान भी गर्भवती महिलाओं का परीक्षण करती हैं। उनकी इस पहल से कई महिलाओं को घर पर ही शुरुआती इलाज मिल जाता है। जरूरी परामर्श भी उन्हें घर पर ही मिल जाता है। गर्भवती उनकी सलाह को गंभीरता से मानती हैं। उनके काम ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और ईमानदारी से किसी भी व्यवस्था में बदलाव लाया जा सकता है।