अमेठी सिटी। मत्स्य पालकों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना से जोड़ा जाए, जिससे वह आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकें। मत्स्य पालक सिर्फ मछली ही नहीं पकड़ते, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये बातें रविवार देर शाम गौरीगंज स्थित विकास भवन सभागार में मत्स्य पालकों के साथ बैठक करते हुए मत्स्य मंत्री संजय कुमार निषाद ने कहीं।
उन्होंने गोष्ठियों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से मत्स्य पालकों को योजनाओं के बारे में जानकारी देने की बता कही। मछुआ दुर्घटना बीमा योजना और मत्स्य पालक कल्याण कोष के तहत चिकित्सा, शिक्षा और विवाह के लिए मिलने वाली अनुदान योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों को दिलाने पर जोर दिया। मंत्री ने अफसरों से कहा कि तहसीलवार ट्रेनिंग शिविर लगवाकर मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण के साथ केसीसी व योजनाओं से लाभान्वित करें। जो विकसित तालाब हैं, वह खाली न रहें। उन्हें मत्स्य पालकों को आवंटित कर दिया जाए।बैंक, ऊर्जा निगम, नेडा आदि विभागों का मत्स्य विभाग के साथ अच्छा समन्वय कर योजनाओं से लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाए।
उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के बारे में भी कहा कि इस योजना का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन को बढ़ाना, मछली पालन से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि करना और आर्थिक दृष्टि से मजबूत करना है। मछुआ समुदाय के बच्चों की शिक्षा के लिए अनुदान की भी व्यवस्था सरकार द्वारा की जा रही है। इस दौरान प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिल कुमार, निषाद पार्टी जिलाध्यक्ष सागर कश्यप आदि मौजूद रहे।