अमेठी सिटी। आलू, सरसों, मटर व गेहूं की बोआई करने वाले किसान डीएपी न मिलने से परेशान हैं। इफको के जिला मुख्यालय गोदाम में डीएपी करीब एक सप्ताह से नहीं है। ऐसे में किसानों को आसपास की समितियों में भेजा रहा है। वहीं समिति संचालक अपने सदस्यों को ही प्राथमिकता के साथ डीएपी उपलब्ध करा रहे हैं।
जिले में खाद की किल्लत बढ़ती ही जा रही है। इफको गोदाम पर खाद वितरण के लिए 2700 मीट्रिक टन खाद की रैक मंगाई गई है, लेकिन बीते एक सप्ताह से खाद की रैक आने का इंतजार किया जा रहा है। जिसके चलते किसानों को खाद के लिए निजी दुकानदारों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। जबकि किसानों का कहना है कि ज्यादा दाम देने पर भी खाद बहुत मुश्किल से मिल पा रही है।
सहकारी समितियों पर 1350 रुपये प्रति बोरी मिलने वाली खाद निजी दुकानों पर 1500 रुपये प्रति बोरी तक दी जा रही है। ऐसे में किसान सहकारी समितियों में खाद देने की मिन्नतें कर रहे हैं। गौरीगंज समिति में पहुंचे किसान ने एक बोरी खाद ही देने की गुहार लगाई, लेकिन सचिव ने उसे बाद में आने के लिए कह दिया। वहीं बड़ी संख्या में किसान मौके पर ही डटे रहे। किसानों का कहना है कि खेत तैयार है, ऐसे में खाद की व्यवस्था होते ही बोआई कर देना है। खाद नहीं मिलने की स्थिति में बोआई का कार्य प्रभावित हो रहा है।
जिले की 75 समितियों पर खाद उपलब्ध
जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से जांच के बाद किसानों को डीएपी दी जा रही है। सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त मित्रसेन वर्मा ने बताया कि जिले की सभी 75 दुकानों पर करीब ढाई हजार मैट्रिक टन खाद उपलब्ध कराई गई है। जहां आधार कार्ड और खतौनी की नकल देखने के बाद ही खाद मुहैया कराई जा रही है। सहायक आयुक्त ने बताया कि अभी खाद सीमित मात्रा में है, ऐसे में किसान किसी तरह से अपना काम चला लें, बाद में प्रचुर मात्रा में खाद उपलब्ध होने पर फिर से दे दी जाएगी।
सूची में नाम न होने से खाद देने मेें आनाकानी
सहकारी समितियों की ओर से उनके कार्यक्षेत्र के गांवों की सूची चस्पा कर दी गई है। ऐसे में आसपास के जिन किसानों के गांव कार्यक्षेत्र में नहीं आते हैं, उन्हें खाद देने में आनाकानी हो रही है। खरावां निवासी आलमगीर ने बताया कि सूची में उनके गांव का नाम नहीं है, जबकि आम तौर पर उन्हें खाद मिलती है। इस बार मना किया जा रहा है। बरनाटीकर के धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने खाद के लिए खतौनी की नकल मंगवाई है। उसके बाद खाद मिलेगी। कटरालालगंज के शिवाकांत शर्मा ने बताया कि खतौनी उपलब्ध नहीं होने से खाद नहीं मिली है। धन्नी जलालपुर के अरविंद ने बताया कि सेंटर पर खाद नहीं मिली है, ऐसे में अब सहकारी समिति की दुकान पर पता करने जा रहे हैं।