मुसाफिरखाना। वर्ष 1982 में गठित नगर पंचायत मुसाफिरखाना में 44 साल बाद भी जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। 10 वार्डों में रहने वाले करीब 11 हजार लोगों को हर वर्ष बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है। नगर पंचायत क्षेत्र में 25 नालियां बनी हैं, लेकिन उनके पानी की निकासी के लिए अब तक मुख्य नाले का निर्माण नहीं कराया गया है।
नगर पंचायत में नालियों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई के लिए 18 सफाईकर्मी तैनात हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर नालियां गंदगी से पटी हैं। अधिकांश नालियों का पानी वार्डों के बीच स्थित तालाबों में पहुंचता है। सामान्य दिनों में तालाब पानी समेट लेते हैं, लेकिन बरसात में इनके भर जाने पर पानी सड़कों, गलियों और घरों तक पहुंच जाता है।
तहसील वार्ड, रेलवे स्टेशन एरिया, घोसियाना, पूरे शिवा तिवारी, सराय मोहल्ला और भवानी चरण वार्ड जलभराव से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। रामलीला मैदान और एएच इंटर कॉलेज परिसर भी बारिश के दौरान पानी से घिर जाते हैं। घोसियाना वार्ड निवासी अनवर अली ने बताया कि हर साल बारिश में मोहल्ले की गलियां जलमग्न हो जाती हैं। तहसील वार्ड के रनदीप सिंह ने कहा कि बस अड्डा और तहसील परिसर के आसपास हल्की बारिश में भी पानी भर जाता है।
भवानीचरण वार्ड के अवनीश तिवारी और पूरे शिवा तिवारी वार्ड के विपिन तिवारी ने बताया कि पिछले वर्ष कई घरों में पानी घुस गया था। रेलवे स्टेशन एरिया वार्ड के संतोष सिंह ने कहा कि नियमित सफाई और मुख्य नाला निर्माण के बिना समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि बरसात से पहले नालियों की सफाई कराई जा रही है। इसके बाद तालाबों की सफाई भी कराई जाएगी, ताकि जलभराव की समस्या को कम किया जा सके।
जलनिकासी की हो समुचित व्यवस्था
सिविल इंजीनियर आरके सिंह ने बताया कि केवल नालियां बनाना पर्याप्त नहीं होता। नालियों के पानी की निकासी के लिए मुख्य नाला और जल संग्रहण की समुचित व्यवस्था आवश्यक है। तालाबों पर निर्भर व्यवस्था बरसात में कारगर नहीं रहती। मुख्य नाले का निर्माण, तालाबों की नियमित सफाई और वर्षा जलनिकासी की बेहतर योजना से समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।