संग्रामपुर के धौरहरा गांव में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
संग्रामपुर। धौरहरा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को प्रयागराज से आए प्रवाचक देवव्रत ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं प्रेम, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उनके जीवन से सीख लेकर मनुष्य अपने व्यवहार में विनम्रता, करुणा और परोपकार को स्थान दे सकता है।
उन्होंने कृष्ण लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को अच्छे संस्कार अपनाने और दूसरों के प्रति सेवाभाव रखने का संदेश दिया। प्रवाचक ने कहा कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों के प्रति दया रखना, जरूरतमंदों की सहायता करना और सत्य के मार्ग पर चलना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि अहंकार, क्रोध और स्वार्थ मनुष्य को सही मार्ग से भटका देते हैं। इनसे दूर रहकर धैर्य और सेवाभाव अपनाने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। परिवार के बड़ों का सम्मान करना, छोटों के प्रति स्नेह रखना और जरूरतमंदों की मदद करना अच्छे संस्कारों की पहचान है। व्यक्ति को अपने हित के साथ दूसरों की खुशियों और परेशानियों का भी ध्यान रखना चाहिए। इससे समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और सद्भाव बढ़ता है।
इस मौके पर बृजबली सिंह, नरेंद्र बहादुर सिंह, अशोक सिंह, बृजेश सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, कमलेंद्र प्रताप सिंह, आशीष सिंह गुड्डू, शैलेश सिंह, राजकुमार सिंह और मनीष सिंह आदि मौजूद रहे।