अमेठी सिटी। जिले के 37 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के 66 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त हैं। विद्यालयों में 560 पदों में से 371 पद खाली हैं। ऐसे में करीब 18 हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षकों की कमी से कक्षाओं में नियमित पढ़ाई, कठिन सवालों का समाधान और विषयवार मार्गदर्शन मिलने में परेशानी हो रही है। इसका असर विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर भी पड़ सकता है।
राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का असर कक्षा संचालन पर पड़ रहा है। उपलब्ध शिक्षकों को कई बार एक से अधिक कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। ऐसे में प्रत्येक कक्षा को पर्याप्त समय देना और विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान करना चुनौती बन जाता है। खासकर उन विषयों में परेशानी बढ़ सकती है, जिनमें लगातार अभ्यास और शिक्षक के मार्गदर्शन की जरूरत होती है।
शिक्षक विद्यार्थियों को पाठ पढ़ाने के साथ कठिन सवाल समझाने, उत्तर लिखने की गलतियां सुधारने और विषय की समझ विकसित करने में मदद करते हैं। पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। इससे पाठ्यक्रम पूरा करने और नियमित अभ्यास करने में भी बाधा आती है।
जिले के 37 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के 23 स्वीकृत पदों में नौ पर तैनाती है, जबकि 14 खाली हैं। प्रधानाध्यापक के 14 पदों में सात पर शिक्षक कार्यरत हैं और सात रिक्त हैं। प्रवक्ताओं के 212 पदों में 43 पर तैनाती है, जबकि 169 पद खाली हैं। सहायक अध्यापकों के 311 पदों में 130 कार्यरत हैं और 171 पद रिक्त हैं। इस तरह कुल 560 स्वीकृत पदों में से 189 पर तैनाती है और 371 पद खाली हैं।
डीआईओएस डॉ. राजेश द्विवेदी ने बताया कि विभागीय समिति के माध्यम से शिक्षकों की तैनाती की व्यवस्था की जा रही है।