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Amethi News: ड्रेन व नाला उफनाए, 2200 बीघा फसल डूबी

Sat, 22 Aug 2026 01:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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. गौरीगंज में पैंगा ड्रेन के उफान से डूबी किसानों की फसल। -संवाद
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अमेठी सिटी। जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था से तिलोई, गौरीगंज और जायस में किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ड्रेन और नालों का पानी खेतों में भरने से करीब 2,200 बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई है। तिलोई में मूंगताल ड्रेन से करीब 1,500 बीघा, गौरीगंज में पैंगा ड्रेन से 400 बीघा और जायस में मट्टन नाले के उफनाने से करीब 300 बीघा फसल प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर सड़क, स्कूल और अस्पताल परिसर में भी पानी भर गया है।
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जलभराव से धान की फसल पर संकट
तिलोई। मूंगताल ड्रेन का पानी खेतों में भरने से करीब 1,500 बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई है। पांच दिन से खेतों में पानी भरा होने के कारण तैयार फसल के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। अलाईपुर, ओनडीह, चौरा, पूरे रानी, उत्तरपारा, नया पुरवा, चिरौंधा, करोंका, सिजनी, पूरे डूंदी, भदसाना, कोटवा, विराज, कमई, पूरे शिवराज, गोकुला और पूरे सूबेदार समेत आसपास के गांवों के किसान प्रभावित हैं। गांव के मुख्य मार्ग पर भी पानी भरा होने से आवागमन प्रभावित है। किसान जगदीश प्रसाद, रामराज, शिव बहादुर, नारायण बख्श और शिव दुलारे ने बताया कि खेतों में लगातार पानी भरा होने से तैयार धान की फसल खराब होने लगी है। दिनेश कुमार, दुर्गेश कुमार और दिलराजा ने बताया कि अधिकांश किसानों ने कर्ज लेकर खेती की है। फसल बर्बाद होने से लागत डूबने के साथ कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो जाएगा। किसानों ने जलनिकासी की तत्काल व्यवस्था कराने और फसल नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है।


पैंगा ड्रेन के पानी से 400 बीघा फसल डूबी
अमेठी सिटी। पैंगा ड्रेन का पानी खेतों में भरने से धारूपुर, असुरा, सोंगरा और धनापुर के किसानों की करीब 400 बीघा धान की फसल प्रभावित हुई है। खेतों में पानी जमा होने से तैयार फसल को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। किसानों ने जलनिकासी की व्यवस्था और प्रभावित फसल का सर्वे कराने की मांग की है।
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मट्टन नाला उफनाने से फसल प्रभावित
जायस। मट्टन नाले का जलस्तर बढ़ने से ओदारी, खरौली, बघेल, मवई आलमपुर और बहादुरपुर में करीब 300 बीघा धान की फसल डूब गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नाले में गाद और झाड़ियां जमा होने से पानी का बहाव बाधित है। हर साल बरसात में समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। मट्टन नाले के पानी से पूरे कोलई गांव का मुख्य मार्ग से संपर्क कट गया है। करीब 200 की आबादी प्रभावित है। जरूरी सामान और इलाज के लिए बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे रेलवे लाइन पार कर आने-जाने को मजबूर हैं। सुरेश कुमार, दिनेश, संतोष, रूपेंद्र और माया समेत ग्रामीणों ने सर्वे, मुआवजा और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की मांग की है।


जलनिकासी के दिए निर्देश
एडीएम ज्योति सिंह ने बताया कि संबंधित विभागों के अधिकारियों से बात कर जलनिकासी की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए गए हैं। जलस्तर घटने के बाद प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जाएगा। इसके आधार पर आपदा विभाग से किसानों को आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी।
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