अमेठी सिटी। आज का दिन खास है। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इन सबके बीच डॉक्टरों के सामने एक अजीब असमंजस है। दरअसल, अब तक करीब छह गर्भवती ने डॉक्टरों से संपर्क किया है। वह 22 जनवरी को प्रसव कराने की इच्छा जता रही है। डॉक्टर भी तैयारी कर रहे हैं लेकिन, उनकी शर्त है कि स्वास्थ्य की जांच में सब कुछ सही मिलता है तो प्रसव कराया जाएगा। इस दिन देश भर में दीपावली जैसा माहौल होगा। कई गर्भवती भी 22 जनवरी को बच्चे को जन्म देकर इस दिन को खुद के लिए बेहद खास बनाना चाहती हैं। महिलाओं व उनके परिजनों ने चिकित्सकों से इच्छा जताई है कि उनके बच्चे का जन्म 22 जनवरी को ही हो, ताकि घर में आने वाले शिशु का नाम राम या जानकी रखा जा सके।
जिले में 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी),30 पीएचसी, जिला अस्पताल हैं। महिला चिकित्सकों का कहना है कि अगर गर्भवती हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के दायरे में नहीं आती है तो 37 सप्ताह पूर्ण होने के बाद प्रसव कराया जा सकता है। 38 से 39 सप्ताह के मध्य प्रसव हो जाना चाहिए।
क्या कहते हैं नक्षत्र
पंडित कपिल देव मिश्र का कहना है कि 22 जनवरी को देव नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग है। इस दिन जो भी संतान होगी वो परिवार, समाज और राष्ट्रहित में कार्य करेगी। स्वभाव में सौम्यता होगी। संतान में देवत्व गुण के साथ शारीरिक रूप से मजबूत होगी। प्राण प्रतिष्ठा के दिन जन्म लेने वाले बच्चों की मिथुन राशि होगी। बच्चे मेधावी और प्रभावशाली होंगे।
गर्भवती के स्वास्थ्य पर तय होगा प्रसव
जिला अस्पताल में सोमवार को कई गर्भवती ऑपरेशन या सामान्य प्रसव के जरिए संतान उत्पन्न कराने की चाह में है। अस्पताल पहुंचने वाली प्रसूताओं की संपूर्ण जांच व प्रसूता तथा नवजात के स्वास्थ्य व प्रसव अवधि पूरी होने की दशा में ऑपरेशन कर प्रसव कराया जाएगा। सामान्य प्रसव आम दिनों की भांति होगें। सोमवार का दिन ऐतिहासिक है।
डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल-सीएमएस