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Amethi News: किसी भी हाल में न छोड़ें साधना का मार्ग

Sat, 10 Oct 2026 12:58 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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तिलोई स्थित राजा विश्वनाथ शरण सिंह इंटर कॉलेज के प्रांगण श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आय
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तिलोई। आरबीएस इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के अंतिम दिन शुक्रवार को प्रवाचक शांतनु महाराज ने शबरी प्रसंग के माध्यम से धैर्य, प्रतीक्षा और अटूट विश्वास का महत्व समझाया। कहा कि शबरी पूरे रामचरितमानस में धैर्य और प्रतीक्षा की प्रतिमूर्ति हैं। उनका जीवन सिखाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, विश्वास और साधना का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
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प्रवाचक ने बताया कि भगवान राम ने शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश दिया। इसके माध्यम से उन्होंने भक्ति के नौ स्वरूप समझाए। यह प्रसंग बताता है कि सच्ची भक्ति के लिए आडंबर नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और समर्पण आवश्यक हैं। जयंत के क्षमा मांगने और भगवान के उसे क्षमा करने का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डाला। माता अनुसुइया के उपदेश, जटायु के त्याग और बजरंग बली की सेवा के प्रसंग भी सुनाए।

उन्होंने बताया कि बजरंग बली का समर्पण और वानरों का सामूहिक परिश्रम लक्ष्य प्राप्ति में सहयोग और निष्ठा का महत्व समझाता है। विभीषण की शरणागति का प्रसंग सत्य के साथ खड़े रहने की सीख देता है। भगवान राम के अयोध्या आगमन और राजतिलक के प्रसंग के साथ कथा का समापन हुआ। यजमान अंकिता सिंह और बबलू सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन किया। विधायक राजीव कुमार सिंह सहित अन्य लोगों ने आरती की। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, उपासना सिंह, मृगांकेश्वर शरण सिंह, उत्कर्ष शरण सिंह, अर्चना सिंह, कृतिका सिंह, मुन्ना सिंह, अखण्ड प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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