अमेठी सिटी। मिलावटी डीजल कारोबार का भंडाफोड़ होने के बाद पेट्रोलपंपों की रैंडम चेकिंग करने वाली टीम सवालों के घेरे में आ गई है। गिरोह का सरगना अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। इस अवैध कारोबार की जड़ें कहां तक फैली हैं, ये उसी से पूछताछ में पता चल सकेगा। फिलवक्त ये जानकारी में आया है कि जिले में तीन हाईवे पर 10 ऐसे स्थान हैं, जहां डीजल में मिलावट का खेल होता है। इनमें कादूनाला और थौरी का सुनसान इलाका सबसे मुफीद माना जाता है।
जिले में इंडियन ऑयल, रिलायंस, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम सहित छह कंपनियों के डिपो से डीजल आता है। 118 पेट्रोलपंप अभी संचालित हैं। जानकारी में आया है कि इंडियन ऑयल कंपनी की ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली से 10 संदिग्ध स्थान चिह्नित किए गए हैं। इन स्थानों पर डीजल लोड कर आ रहे टैंकर लंबे समय तक रुकते हैं। यहीं टैंकरों से डीजल निकालकर केमिकल मिलाया जाता है। सूत्रों के अनुसार कादूनाला, थौरी, परतोष, नहर कोठी, राजामऊ, पलिया चंदापुर, कमरौली के सुनसान इलाके इस सूची में शामिल हैं।
डीएसओ शशिकांत सेन ने बताया कि पेट्रोलपंप से डीजल व पेट्राेल में मिलावट न हो इसके लिए नियमित जांच की जाती है। सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाते है। अब तक जांच में मिलावट से जुड़ी कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।
जगदीशपुर पुलिस ने किया था भंडाफोड़
जगदीशपुर पुलिस ने बुधवार को रायबरेली रोड स्थित मुबारकपुर बालू मंडी मुसाफिरखाना के रायपुर पलिया चंदापुर गांव निवासी जितेंद्र कुमार और जामों के जनेपुर गांव निवासी नीरज पांडेय को चार पहिया वाहन के साथ पकड़ा था। वाहन में 12 ड्रम केमिकल बरामद हुआ था। पुलिस गिरोह के सरगना जामों के रामपुर चौधरी गांव निवासी धीरेंद्र प्रताप सिंह और उसके साथियों की तलाश में जुटी है। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि गिरोह के सदस्य टैंकरों को तय स्थानों पर रोकते हैं और वहीं मिलावट की जाती है।
जांच के बाद पंप पर उतरता है डीजल
जिला पूर्ति विभाग की मानें तो टैंकर पहुंचने पर पेट्रोलपंप पर डीजल का प्रारंभिक परीक्षण फिल्टर पेपर से होता है। रंग में बदलाव दिखने पर मिलावट का संकेत मिलता है। टैंकर खाली करने से पहले नमूना लेकर सील बंद किया जाता है। यह नमूने समय-समय पर प्रयोगशाला भेजे जाते हैं।
कई प्रकार के केमिकल से तैयार होता है मिलावटी डीजल
जांच में सामने आया कि मिलावट के लिए कई प्रकार के रसायन प्रयोग में लाए जाते हैं। डीजल में सॉल्वेंट मिलाया जाता है। इसके बाद एथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल का मिश्रण डाला जाता है। हल्के हाइड्रोकार्बन मिलाकर रंग और गंध को डीजल जैसा बनाया जाता है। कुछ स्थानों पर सस्ते पाम ऑयल या अन्य खाद्य तेल मिलाकर वॉल्यूम बढ़ाया जाता है। प्रति लीटर मिलावटी डीजल से लगभग 50 रुपये कमाई होती है।
रैंडम जांच, फिर भी खाली हाथ
पेट्रोल और डीजल की शुद्धता परखने के लिए आपूर्ति निरीक्षक, बाट-माप निरीक्षक और तेल कंपनी प्रतिनिधि हर माह पेट्रोलपंपों पर रैंडम जांच करते हैं। पिछले एक साल के आंकड़े बताते हैं कि कहीं भी मिलावटी पेट्रोल या डीजल नहीं मिला। पुलिस के खुलासे में डीजल में मिलावट की बात सामने आई है। ये भी बताया गया कि डीजल पेट्रोलपंपों पर भेजा गया। ऐसे में विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो गई है कि कौन सच्चा और कौन झूठा।
वाहन का इंजन सीज होने का रहता है खतरा
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ मोहम्मद जावेद के अनुसार मिलावटी ईंधन से इंजन की कार्यक्षमता घटती है। गाड़ी को स्टार्ट करने में समस्या आती है और धुआं अधिक निकलता है। वाहन का इंजन सीज होने का खतरा रहता है।