अमेठी। जिला अस्पताल में ब्लड बैंक का संचालन नहीं होने से डायलिसिस के मरीजों को खासी परेशानी उठाना पड़ रही है। जरूरत के समय मरीजों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सुविधा नहीं मिल पाने से दिक्कत उठाना पड़ती है।जिला अस्पताल में मरीजों को डायलिसिस के लिए छह बेड व मशीनों की व्यवस्था है। इसमें पांच साधारण डायलिसिस की तो एक बेड हेपेटाइटिस व गंभीर मरीजों के लिए अलग कक्ष में व्यवस्था है। इसके बावजूद ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़े डायलिसिस के मरीजों को खून के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को सुल्तानपुर, रायबरेली व अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों के ब्लड बैंकों का चक्कर काटना पड़ रहा है।
डायलिसिस टेक्नीशियन अंकित शुक्ला ने बताया कि जनरल मरीजों का पांच बेड पर व हेपेटाइटिस पॉजीटिव मरीजों का अलग कक्ष में अलग बेड पर डायलिसिस होता है। बताया कि ब्लड बैंक नहीं होने से मरीजों को खून का प्रबंध बाहर से करना पड़ता है। प्रतिदिन तीन शिफ्टों में 18 मरीजों का डायलिसिस होता है। सितंबर माह में 458 , अक्तूबर में अब तक 248 मरीजों का डायलिसिस हुआ है।
ब्लड बैंक के लिए लाइसेंस का आवेदन किया गया है। सभी उपकरण आ गए हैं। लाइसेंस मिलने के बाद ब्लड बैंक का संचालन शुरु हो जाएगा। उसके बाद डायलिसिस से जुड़े मरीजों के साथ ही अन्य को भी इसकी सुविधा मिलने लगेगी।
डॉ. बीपी अग्रवाल, सीएमएस