मुसाफिरखाना। भगवान की भक्ति मनुष्य के मन से अहंकार दूर करती है। उसे विनम्र बनाती है। ईश्वर पर विश्वास रखने वाला व्यक्ति सुख में अभिमान नहीं करता। कठिन समय में निराश भी नहीं होता। रविवार को गांधी पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उज्जैन के महामृत्युंजय धाम के पीठाधीश्वर प्रणवपुरी महाराज ने कथा के प्रसंगों के माध्यम से यह संदेश दिया।
प्रवाचक ने कहा कि समय कभी एक जैसा नहीं रहता। ऐसे में मनुष्य को परिस्थितियों से घबराने के बजाय अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए। भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करना भी भक्ति है। जरूरतमंद की सहायता करना भी भक्ति का भाव है। बच्चों से स्नेह और दूसरों के प्रति सद्भाव रखना भी इसी भावना का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की पहचान उसके धन और पद से नहीं होती। उसका आचरण ही उसकी पहचान बनता है। असफलता मिलने पर निराश होने के बजाय उससे सीख लेनी चाहिए। ईश्वर पर विश्वास रखते हुए अच्छे कर्म करते रहना चाहिए। इस मौके पर मुख्य यजमान रामचंद्र द्विवेदी, विवेक मिश्रा, दिवाकर द्विवेदी, रामकिंकर मिश्र, बब्बन पांडेय और विजय बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।