अमेठी सिटी। जिला मुख्यालय गौरीगंज को सजाने संवारने का काम विकास प्राधिकरण करेगा। इसकी कवायद शुरू करते हुए जिलाधिकारी संजय चौहान ने विकास प्राधिकरण के गठन के लिए शासन को एक प्रस्ताव भेजा है। शासन की सहमति के बाद प्राधिकरण के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। विकास प्राधिकरण गठित होने से गौरीगंज का विकास मेट्रो सिटी की तर्ज पर हो सकेगा। डीएम ने बताया कि गौरीगंज के सुनियोजित विकास के लिए विकास प्राधिकरण गठित होना बेहद जरूरी है।
गौरीगंज नगर पालिका 25 वार्डों में विभाजित है। यहां की आबादी करीब 35 हजार है। विकास प्राधिकरण के गठन का जो प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, उसमें शहर क्षेत्र के अलावा आसपास के करीब 35 गांव क्षेत्र को शामिल किया गया है। डीएम के निर्देश पर कर्मचारियों ने विकास प्राधिकरण का प्रारूप तैयार किया और समुचित प्रस्ताव में सभी बिंदुओं को समाहित करते हुए विकास क्षेत्र का मानचित्र भी बना लिया गया है। शासन को भेजे गए प्रस्ताव में विकास प्राधिकरण के गठन के लिए जरूरी सभी नियम और शर्तें पूरी की गई हैं।
विकास प्राधिकरण बनने से बढ़ेगी सहूलियतें
विकास प्राधिकरण घोषित होने के बाद नगरवासियों सहित आसपास के ग्रामीणों को बहुत सी सहूलियत मिलेगी। प्राधिकरण गठित होने से सभी निर्माण मानक अनुरूप हो सकेंगे। पार्क, पेयजल व्यवस्था, बिजली, सड़क, नाली, सीवर का इंतजाम आवासीय भवन का नक्शा तैयार करते समय ही किया जाएगा। जहां जैसी जमीन होगी, उसी के अनुसार आवासीय सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। औद्योगिक क्षेत्र, कृषि क्षेत्र, समतल एरिया अलग-अलग चिह्नित होंगे। विकास प्राधिकरण क्षेत्र में बाजारों के सृजन, आवासीय प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम होगा। नक्शा पास कराने के लिए लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
मनमाने भवन निर्माण पर लगेगी रोक
प्राधिकरण खुद की बनाई कॉलोनियों में मानकों का पूरा ध्यान रखता है और निजी कॉलोनियों में भी मानकों का पालन कराता है। कॉलोनी में कम से कम नौ मीटर की सड़क का होना जरूरी है। साथ ही मास्टर प्लान के हिसाब से लैंड यूज का इस्तेमाल हो सकेगा। आवासीय कालोनी में 15 प्रतिशत पार्क एरिया, 10 प्रतिशत ईब्ल्यूएस यानी इकॉनामिकली वीकर सेक्शन और 10 प्रतिशत लो इनकम ग्रुप यानी एलआईजी के प्लॉट भी छोड़े जा सकेंगे। व्यावसायिक भवन के लिए भी कुल स्थान के 40 प्रतिशत क्षेत्र में ही भवन बनाया जा सकेगा। पार्किंग के लिए जगह निर्धारित होने से जाम की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा।
विकसित होंगी नई कॉलोनियां
सभी नगर निकाय समेत राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्ग की 200 मीटर परिधि में आने वाले सभी गांव इसके कार्य क्षेत्र में आएंगे। उन्होंने बताया कि 30 वर्ग मीटर साइज की दुकानों और 200 वर्ग मीटर के मकानों के निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं होगी। आवश्यकतानुसार सुरक्षा के साथ अन्य कर्मी भी तैनात किए जाएंगे।