अमेठी सिटी। जिले में किसान डीएपी के लिए भटक रहे हैं। कई समितियां व इफको केंद्र खाली हैं। विभाग का दावा पूरी तरह फेल नजर आ रहा है। गौरीगंज इफको केंद्र पर चार दिनों बाद डीएपी पहुंची तो यहां किसानों की लंबी कतार दिखी। महिलाएं अपने नवजात बच्चों को गोद में लेकर कतार में खाद लेने के लिए लगी दिखीं।
इस समय गेहूं संग आलू, दलहन और तिलहन आदि फसलों की बोआई तेज है। डीएपी की मांग बढ़ी तो समितियों व केंद्रों पर खाद ही नहीं है। हालात ये हैं कि समितियों व इफको केंद्रों पर खाद नहीं होने से किसानों की बोआई प्रभावित हो रही है। जिला मुख्यालय गौरीगंज स्थित माधोपुर समिति पर डीएपी नहीं होने से सन्नाटा पसरा रहा। गौरीगंज स्थित इफको केंद्र पर चौथे दिन सोमवार को डीएपी पहुंची तो यहां पर किसानों की लंबी कतार लग गई। वहीं गौरीगंज स्थित माधोपुर, चंदौकी सहित 25 समितियों पर डीएपी नहीं थी। यहां पर मिलीं संगीता अपने नवजात को गोद में लेकर कतार में लगी दिखीं। बताया कि डीएपी के लिए सुबह सो लाइन में लगी है, अभी तक नंबर नहीं आया।
कृषि विभाग की ओर से पर्याप्त खाद की व्यवस्था नहीं की गई है। समितियों व इफको केंद्रों पर डीएपी नहीं है। डीएपी के लिए चक्कर काटना पड़ रहा है। सावित्री पाल ने बताया कि दो साल के बच्चे को घर पर छोड़ कर आई है। सुबह से लाइन में लगी हैं, अभी तक नंबर नहीं आया। कृपाशंकर ने बताया कि छह बजे लाइन में लगे हैं। चार बोरी डीएपी और और दो बोरी यूरिया लेनी है। आरोप लगाया कि समितियों पर रात में ही खाद बेच दी जा रही है। बताया कि पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं है।
राजाराम ने बताया कि दो बोरी डीएपी लेनी है। समितियों पर नहीं मिल रही है। इसी तरह किसान राधव राम, शिवकुमारी आदि ने बताया कि यहां पर खाद मिलने की जानकारी हुई थी। आज यहां पर चार दिनों बाद डीएपी आई है। सुबह से किसान बगैर खाए-पिए लाइन में लगे हैं। कई जगह चक्कर काटने के बाद यहां पर डीएपी मिल पाई। कहा कि खेतों की नमी चली जा रही है, किसी तरह बोआई करनी पड़ेगी। इससे गेहूं, आलू, मटर आदि की फसलों की बोआई प्रभावित हो रही है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि डीएपी व एनपीके पर्याप्त है। मांग के अनुसार समितियों पर खाद भेजी जा रही है।
14 समितियों व इफको केंद्र पर भेजी गई 2065 क्विंटल डीएपी
साधन सहकारी समिति गोपियाभानपुर, गुसाफिरखाना, थौरी, ब्रह्मनी, सैंठा, सहकारी संघ जगदीशपुर, ढेमा, पन्हौना, पनियार, ओदारी और निगोहा में 150-150 क्विंटल डीएपी भेजी गई है। वहीं सहकारी संघ रानीगंज में 140 क्विंटल और शाहमऊ में 125 क्विंटल डीएपी भेजी गई है।
एनपीके से गेहूं के दाने होते हैं मजबूत व चमकदार
उप कृषि निदेशक सत्येंद्र कुमार ने बताया कि एनपीके व एनपीएस खेत की उर्वरा शक्ति के लिए बेहतर है। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर होता है जो आलू, तिलहन व दलहन की बोआई के लिए सबसे उपयुक्त होता है। यह गेहूं की बोआई के लिए भी उपयुक्त है। इससे गेहूं के दाने मजबूत एवं चमकदार होते हैं। इसके प्रयोग से फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। इसके साथ ही किसान गोबर की खाद व कंपोस्ट खाद का उपयोग करें जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है।