अमेठी सिटी। ठंड का सितम जारी है। बुधवार को कड़ाके की ठंड और गलन से जनजीवन बेहाल रहा। दिनभर सूर्य के दर्शन नहीं हुए। गेहूं छोड़कर अन्य फसलों में पाला लगने का खतरा बढ़ गया है। इसने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है।
जिले में सप्ताहभर से शीतलहर का कहर जारी है। बुधवार को बर्फीली हवा ने लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है। ठंड से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे। शहर में नगर पालिका की ओर से राहगीरों के लिए अस्थायी बस डिपो, रेलवे स्टेशन समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। चौराहों और सड़कों पर लोग अलाव का सहारा लेकर ठंड को दूर करने का प्रयास करते नजर आए।
कोहरे के चलते खेती को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। किसान अजोरे, सुंदर व भगौती का है कि यदि जल्द ही मौसम कुछ ठीक नहीं हुआ था मटर, आलू व सरसों के साथ अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचना तय है। ठंड से आलू व सरसों के साथ ही मटर को भी नुकसान हो रहा है।
कृषि मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 14.5 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 7.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बताया कि हवा की गति 2.3 किमी प्रतिघंटा रही।
यह होती है समस्या
- जिला कृषि अधिकारी रविकांत ने बताया कि सर्दी में तापमान गिरने के साथ ही अपेक्षित आर्द्रता बढ़ने से रबी की फसल कीट व रोग की चपेट में आ सकती हैं। किसान सही समय पर दवाओं को छिड़काव करके फसल को रोगों से बचा सकते हैं। आलू की फसल में अगेती व पछेती झुलसा रोग, राई व सरसों की फसल में माहू कीट व पत्ती धब्बा रोग, मटर की फसल में मिल्ड्यू रोग तथा गेहूं की फसल में पीली गेरुई रोग लगने की आशंका ज्यादा होती है।
इन फसलों को ऐसे बचाएं किसान
- जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि आलू को झुलसा रोग से बचाने के लिए मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी दो किलोग्राम व कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2.5 किलोग्राम को प्रति हेक्टेयर 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
सरसों की फसलों को माहू कीट से बचाने के लिए एजाडिरैक्टिन ईसी की 2.5 किलोग्राम को पानी में घोल कर छिड़काव करें। साथ ही डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी ऑक्सीडेमेटान मेथाइल 25 प्रतिशत व क्लोरपाइरीफास एक लीटर को 700 लीटर पानी में घोल कर फसल में छिड़काव कर सकते हैंं। जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी दो किलोग्राम व कॉपर आक्सीक्लोराइड तीन किलोग्राम प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव कर मटर की फसल को मिल्ड्यू रोग से बचा सकते हैं।