अमेठी सिटी। अमेठी की राजनीति में कई चेहरे आए और गए, मगर तेजभान सिंह ने अपनी अलग पहचान बनाई। चार बार विधायक, भाजपा के वरिष्ठ नेता और लोकतंत्र सेनानी के रूप में लंबा राजनीतिक सफर तय करने के बाद भी उन्होंने सत्ता से ज्यादा लोगों के दिलों में जगह बनाई। यही कारण रहा कि पूरा क्षेत्र उन्हें स्नेह और सम्मान से ‘दादा’ कहकर पुकारता था।
जामों के अचलपुर स्थित उनके आवास तक पहुंचने के लिए किसी परिचय या सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ती थी। किसान, मजदूर, व्यापारी, छात्र, कर्मचारी या बुजुर्ग, हर कोई बेझिझक अपनी बात दादा के सामने रखता था।
लोगों की समस्याएं सुनना और उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से बात करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। कई बार देर शाम तक फरियादियों की समस्याएं सुनने का सिलसिला चलता रहता था।
चार बार विधायक बनने के बाद भी दादा की जीवनशैली में कोई बदलाव नहीं आया। साधारण कुर्ता-धोती, सादा रहन-सहन और गांव की चौपालों में लोगों के बीच बैठना उनकी पहचान बना रहा। कार्यकर्ताओं के काम के लिए अधिकारियों से बेबाकी से बात करना और समाधान होने तक प्रयास करते रहना उनके स्वभाव का हिस्सा था।
राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दादा ने व्यक्तिगत संबंधों में हमेशा आत्मीयता बनाए रखी। यही वजह रही कि उनके निधन पर दलगत सीमाएं पीछे छूट गईं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
रविवार को अचलपुर में अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ इस बात की गवाह बनी कि उन्होंने केवल चुनाव नहीं जीते, बल्कि अपने व्यवहार, सादगी और जनसेवा से लोगों के दिलों में स्थायी स्थान बनाया। (संवाद)