अमेठी सिटी। छह जनवरी 2022 को जिलाधिकारी पद की बागडोर संभालने वाले राकेश कुमार मिश्र ने 753 दिनों तक जिम्मेदारी संभाली। इस अवधि में विधानसभा के साथ ही निकाय चुनाव कराया। साथ ही कई बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया। प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राकेश कुमार मिश्र को अमेठी का डीएम बनाया गया था। सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा चुनाव कराना था। चुनाव संपन्न होने के बाद उन्होंने सिस्टम को सही करने की मुहिम शुरू कर दी। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग में मुआवजे के नाम पर हुए घोटाले का राजफाश किया। इसमें 382 करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी। इसमें दो एसडीएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। कई अन्य अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
सड़कों का भ्रष्टाचार हो या फिर कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी, कई के खिलाफ केस दर्ज कराया। गोवंश संरक्षण को लेकर अपनी निगरानी में अभियान चलाया। गत वर्ष निकाय चुनाव को भी कराया।
निवर्तमान डीएम राकेश कुमार मिश्र ने औद्योगिक विकास को एक नई दिशा दी। उद्यमियों से संवाद किया। कोका कोला के बाॅटलिंग प्लांट का शुभारंभ कराया। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की राह में आ रही समस्याओं को अपने व्यक्तिगत प्रयास से दूर कराया। साथ ही साहित्य में भी उन्होंने नाम कमाया। हाल ही में उनकी लिखी पुस्तक का विमोचन लखनऊ में किया गया।
सुर्खियों में रहा वकीलों के साथ विवाद
- निवर्तमान डीएम व अधिवक्ताओं के बीच विवाद भी खूब चर्चा में रहा। इसकी गूंज उच्च न्यायालय तक पहुंची। कई दिन अधिवक्ता हड़ताल पर रहे। वहीं, निकाय चुनाव के दौरान कोतवाली में हुए हंगामे को नियंत्रित किया।