इन्हौना (अमेठी)। तिलोई ब्लाॅक क्षेत्र के राजापुर हलीम गांव के काली माता मंदिर पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन वृंदावन धाम से आए प्रवाचक आचार्य रामचंद्र दास महाराज ने कहा कि गाय, गीता और गंगा हमारी पहचान हैं। आज तीनों चीज खतरे में हैं।
प्रवाचक ने कहा कि लोगों को खुद ही इनकी रक्षा के लिए आगे आना होगा। गंगा प्रदूषित होती जा रही हैं, गाय के प्रति लोगों का प्रेम खत्म होता जा रहा है और गीता महज एक पुस्तक बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि गंगा को निर्मल बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन फिर भी गंगा को स्वच्छ नहीं किया जा सका है। पहले गाय को माता मानकर सेवा की जाती थी, लेकिन अब गाय को भी लोग सड़क किनारे छोड़ देते हैं।
प्रवाचक ने कहा कि अगर गीता का अध्ययन मन से करें तो फिर कोई समस्या ही नहीं रहेगी। मानव जीवन का सार गीता में छिपा है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान देकर उन्हें धर्म और अधर्म के बीच के अंतर को न सिर्फ समझाया, बल्कि मोह-माया के बंधन से भी मुक्त किया। आज के परिवेश में इन तीनों को बचाने के लिए सभी को आगे आने की जरूरत है। इस मौके पर यजमान रामभरोसे तिवारी, बबलू, शिव प्रकाश, आनंद, अनुपम, देवी शंकर मिश्रा, शिवम, श्रीकांत पाण्डेय, श्यामू मिश्रा आदि मौजूद रहे।