अमेठी सिटी। एल्युमिनियम लीचिंग के खतरे को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने मध्याहन भोजन (मिड डे मील) के लिए बड़ा फैसला लिया है। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को एल्युमिनियम के बर्तनों में बना भोजन नहीं दिया जाएगा, बल्कि स्टील के बर्तन खरीद कर उसमें भोजन दिया जाएगा। बच्चों की सेहत पर संकट को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने पत्र जारी कर मध्याहन भोजन तैयार करने में स्टील के बर्तन इस्तेमाल करने को कहा है। धन आवंटन के बाद नए बर्तन खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है।
जिले में मध्यान्ह भोजन योजना से आच्छादित विद्यालयों में अब एल्युमिनियम के बजाए स्टेनलेस स्टील के बर्तन में भोजन पकाने पर जोर दिया जा रहा है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की निदेशक कंचन वर्मा ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को पत्र जारी कर बताया कि स्टेनलेस स्टील की बर्तन में भोजन बनाया जाए।
1,72,456 बच्चों का भोजन पकाया जाता
पत्र में कहा कि एल्युमिनियम के बर्तन में भोजन पकाते समय लीचिंग का खतरा रहता है। इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जिले में 1570 प्राथमिक विद्यालय, 16 राजकीय, 4 मदरसा, 33 एडेड और 26 माध्यमिक विभाग के सहायता प्राप्त कॉलेज है। योजन से जिले में 172456 बच्चों कोे दोपहर में मैन्यू के अनुसार गर्म-पका-पकाया भोजन दिया जाता है। भोजन पकाने में एल्युमिनियम के बर्तन का प्रयोग किया जा रहा है। बीएसए संजय कुमार तिवारी ने कहा कि जिन विद्यालयों में एल्युमिनियम के बर्तन हैं, वह उसी में भोजन पकाएंगे। बर्तन खरीदने की जरूरत पड़ेगी, वह स्टेनलेस स्टील बर्तन खरीदें जाएंगे।
यह होता है यह नुकसान
डॉक्टरों की मानें तो एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना पकाने से वो खाने से आयरन और कैल्शियम जैसे तत्वों को सोख लेता है। इसका मतलब यदि खाने के साथ एल्युमीनियम पेट में जाता है तो यह शरीर से आयरन और कैल्शियम सोखना शुरू कर देता है। हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त अस्थि रोग (जैसे ऑस्टियोपोरोसिस), आंखों की बीमारियां, अतिसार, अतिअम्लता, खट्टी डकार, पेट दर्द, कोलाइटिस (आंत का संक्रमण) तथा मुंह में बार-बार सूजन आना और एक्जिमा जैसे त्वचा रोग होने की संभावना रहती है।