अमेठी सिटी। मौसम में बदलाव के साथ खांसी-जुकाम के मरीज तो बढ़े हैं, लेकिन मेडिकल स्टोरों पर एलोपैथिक कफ सिरप की मांग में करीब 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में एलोपैथिक सिरप कोल्ड्रिफ से बच्चों की मौत के मामलों के बाद अभिभावकों में गहरी चिंता देखी जा रही है। अब बच्चे ही नहीं, युवा और बुजुर्ग भी एलोपैथिक सिरप की जगह आयुर्वेदिक विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं।
जिले में लगभग 1360 मेडिकल स्टोर संचालित हैं। कुछ माह पहले तक हर स्टोर पर प्रतिदिन औसतन 25 से 30 बोतल कफ सिरप बिक जाती थी, लेकिन अब यह संख्या घटकर आधी रह गई है। दवा कारोबारियों के अनुसार, बिक्री में लगभग 50 फीसदी की कमी आई है। मरीज अब डॉक्टर की सलाह लेकर ही सिरप खरीद रहे हैं। मेडिकल स्टोर संचालक भी मरीज को सिरप देने बच रहे हैं। दूसरी ओर, आयुर्वेदिक कास्कोडिन हनी टस, सितोपलाद चूर्ण और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ी है। एलोपैथिक के एस्कोरिल, ब्रेनाड्रिल और टस क्यू जैसे लोकप्रिय ब्रांडों की बिक्री पर भी असर पड़ा है।
अमेठी दवा व्यवसायी संघ के अध्यक्ष अनुज तिवारी ने बताया कि कफ सिरप की बिक्री में गिरावट से दवा कारोबार प्रभावित हुआ है। लोग डॉक्टर की सलाह लेकर ही सिरप खरीद रहे हैं। एलोपैथिक उत्पादों की मांग घटी है, जबकि आयुर्वेदिक सिरप की बिक्री बढ़ी है।