अमेठी तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान कतार में खड़े फरियादी। संवाद
अमेठी सिटी। मार्ग चिह्नित कराने व निर्माण कराए जाने के संबंध में 20 से अधिक बार शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। लगातार समाधान दिवस में एक ही शिकायती पत्र देता आ रहा हूं। हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। गलत रिपोर्ट लगाकर शिकायत का निस्तारण कर दिया जाता है। ये बातें गौरीगंज तहसील में आयोजित समाधान दिवस में पहुंचे पठानपुर निवासी राजेंद्र प्रसाद मौर्य ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहीं। करीब 11:38 बजे तक सिर्फ यहां पर एसडीएम प्रीति तिवारी ही सुनवाई करती दिखीं।
अमेठी तहसील परिसर में डीएम संजय चौहान व एसपी अपर्णा रजत कौशिक ने संपूर्ण समाधान दिवस की सुनवाई की। यहां आए 36 मामलों में एक का मौके पर निस्तारण कराया गया। तहसील तिलोई में 34 शिकायतों में से चार, गौरीगंज में 47 में से छह का निस्तारण अफसरों ने किया। मुसाफिरखाना में 29 शिकायतों में पांच का निस्तारण हुआ। शेष शिकायतों के निस्तारण के लिए पुलिस और राजस्व की संयुक्त टीमें गठित की गई है।
गौरीगंज के रोहसी खुर्द निवासी वृद्धा राजकली अपनी शिकायत बताते हुए रो पड़ीं। कहा कि पड़ोसी दसई ने उनके मकान की तरफ बनी कच्ची दीवार कहने पर भी नहीं गिरवाई। बारिश में दसई की कच्ची दीवार उनकी पक्की चारदीवारी पर गिर गई। कहा कि तीन बार गौरीगंज पुलिस से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां पर शिकायत की है, पर सिर्फ आश्वसन ही मिला है।
अमेठी के सवनगी निवासी बुजुर्ग शीतला प्रसाद ने एसपी से शिकायत करते हुए बताया कि सहन के सामने विपक्षी ने दीवार बना ली है। विरोध करने पर विपक्षियों ने उनकी पिटाई कर दी। पीपरपुर पुलिस ने मेडिकल कराने के बाद भी अब तक केस नही दर्ज किया। लगातार थाने का चक्कर काटने के बाद भी सुनवाई नही हो रही है। अमेठी के राजापुर कोहरा निवासी रामदेव ने बताया कि पट्टे की भूमि पर विपक्षियों ने कब्जा कर लिया है। नौ बार मामले की शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नही हुई।
अमेठी के ठेंगहा गांव के रामलखन आदि ने बताया कि 10 साल से फाटक के समीप खड़ंजा लगा है। रास्ते के बीच में नीम का पेड़ होने से कोई वाहन गांव नहीं पहुंच पाता। वहीं वैवाहिक कार्यक्रम में किसी के दरवाजे पर चार पहिया वाहन से बरात नहीं पहुंच पाती है। ऐसे में 30 नवंबर को बेटी की बरात कैसे द्वार पर पहुंच पाएंगी। कई बार शिकायत की, सिर्फ आश्वासन ही मिला।