गौरीगंज (अमेठी)। एक जुलाई वर्ष 2010 को जिला गठन के बाद शहर के विशुनदासपुर में निर्माणाधीन स्थाई कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण स्वीकृति के चार वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका। 5.38 करोड़ रुपये की संपूर्ण राशि खर्च करने के बाद कार्यदाई संस्था ने 21.89 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित आगणन भेजते हुए धनावंटन की मांग की है।
पुनरीक्षित आगणन सचिव राजस्व परिषद कार्यालय में अब तक लंबित पड़ा हुआ है। आलम यह है कि स्वीकृत राशि निर्गत होने तथा कई बार निर्माण की समय सीमा बढ़ाने व डीएम के निर्देश के बावजूद कार्य कब तक पूरा होगा कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में सूबे की तत्कालीन सपा सरकार में कलेक्ट्रेट निर्माण के लिए विशुनदासपुर में चिन्हित 36.152 हेक्टेयर भूमि पर पांच करोड़ 38 लाख 64 हजार रुपये की लागत से स्थाई कलेक्ट्रेट भवन निर्माण को स्वीकृति प्रदान करते हुए पहली किश्त के रूप में दो करोड़ रुपये 14 दिसंबर 2016 को अवमुक्त हुई थी।
शासन ने राशि अवमुक्त करनेे के बाद पैक फेड (उत्तर प्रदेश राज निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड) को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था। प्रारंभ से ही निर्माण कार्य के प्रति लापरवाही बरत रही कार्यदायी संस्था ने अवमुक्त राशि का उपभोग करने के बाद 2018 में शासन से दूसरी किश्त की डिमांड की थी।
कार्यदायी संस्था की मांग पर शासन ने 19 फरवरी 2018 को अवशेष तीन करोड़ 38 लाख 64 हजार रुपये अवमुक्त करते हुए अविलंब निर्माण कार्य पूरा करने को कहा था। शासन के निर्देश व जिला प्रशासन के दवाब के बावजूद कार्यदाई संस्था ने निर्माण कार्य पूरा नहीं किया। निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने तथा समय से कार्य पूरा नहीं करने के चलते इस बीच निर्माण सामग्रियों की राशि में बढ़ोत्तरी हो गई।
इसके चलते पूर्व में स्वीकृत राशि से निर्माण कार्य पूर्ण होना संभव नहीं था। पूरा नहीं होने के चलते कार्यदायी संस्था ने 21.89 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित आगणन भेजते हुए धनावंटन की मांग करते हुए निर्माण की गति को और धीमा कर दिया है।
लगातार शासन को भेजा गया पत्र
भवन निर्माण का कार्य पूरा हो सके इसके लिए डीएम शकुंतला गौतम, योगेश कुमार, प्रशांत शर्मा ने दो-दो बार तो वर्तमान जिलाधिकारी अरुण कुमार ने कई बार शासन को धनावंटन के लिए पत्र भेजा है। बावजूद इसके पुनरीक्षित आगणन को आज तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
महज इतना काम हुआ
विशुनदासपुर में चिन्हित भूमि पर कार्यदाई संस्था की ओर अब तक मात्र मुख्य भवन के साथ भवन की फर्श का कार्य ही पूरा किया गया है। निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत संपूर्ण भवन के साथ ही बाउंड्रीवॉल, परिसर मेें मिट्टी भराई, वायरिंग, प्लंबरिंग व पेंटिंग का काम भी नहीं किया गया है।
तहसील भवन में चल रहा कलेक्ट्रेट
जिला गठन के बाद से गौरीगंज तहसील भवन में कलेक्ट्रेट कार्यालय का संचालन हो रहा है। कलेक्ट्रेट के हिसाब से अधिकारियों व कर्मियों को कक्ष आवंटित नहीं होने तथा संसाधन नहीं मिलने से जहां कार्यों के निष्पादन में परेशानी हो रही है वहीं लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
कराया जाएगा धनावंटन : एडीएम
एडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि कलेक्ट्रेट निर्माण कार्य जल्द पूरा हो सके इसके लिए शासन को पत्र भेजकर धनावंटन का अनुरोध व प्रभावी पैरवी की जा रही है। जल्द ही पुनरीक्षित आगणन को मंजूरी व धनावंटन कराते हुए निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा।
चार मार्च 2016 को मिली थी स्वीकृति
सूबे की तत्कालीन सरकार ने जिला प्रशासन की ओर से भूमि चिन्हित होने के बाद चार मार्च को तैयार अनुमानित लागत को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी। स्वीकृति के बाद चार अप्रैल को लखनऊ में शिवपाल सिंह यादव ने इसकी आधार शिला रखी थी। आधार शिला रखने के लिए सचिव राजस्व परिषद ने कार्यदाई संस्था के खातेे में पहली किश्त अवमुक्त करते हुए जिला प्रशासन को जल्द निर्माण कार्य पूरा करवाने को कहा था।
जल्द पूरा कराया जाए निर्माण
मनीषी महिला पीजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. नीलम शांडिल्य ने कहा कि कलेक्ट्रेट नहीं होने से फरियादियों को दिक्कत उठानी पड़ती है। विनोद पांडेय ने कहा कि सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए। इंदिरा गांधी पीजी कॉलेज के शिक्षक लालता प्रसाद द्विवेदी अगम और एडवोकेट शिव किशोर शुक्ल ने भी जल्द कलेक्ट्रेट बनवाने की मांग की।