गौरीगंज (अमेठी)। वर्ष 1988 में हुए एक आपराघिक मामले में अमेठी कोतवाली पुलिस ने सिंगल बैरल बंदूक जब्त करते हुए जमा की थी। 2017 में न्यायालय से दोष मुक्त होने के बाद 2019 में न्यायालय ने जमा बंदूक को रिलीज करने का आदेश जारी किया। तब से बंदूक स्वामी थाने का चक्कर लगा रहा है लेकिन पुलिस 35 साल पहले जमा बंदूक ढूंढ़ नहीं पा रही है।
ककवा गांव निवासी सेना के रिटायर्ड टेक्निकल हवलदार अवध बिहारी त्रिपाठी सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। बताया कि 1986 में उन्होंंने बंदूक खरीदी थी। 1988 में उनका भांजा बंदूक के साथ एक आपराधिक वारदात में पकड़ा गया था। तभी से अमेठी पुलिस ने बंदूक को जब्त कर थाने के मालखाने में जमा कर दिया था। बताया कि 2017 में उनके भांजे को कोर्ट ने दोष मुक्त कर दिया। इसके बाद उनकी ओर से बंदूक को रिलीज करने का आवेदन करने पर कोर्ट ने 2019 में रिलीज आदेश जारी कर दिया।
डीएम से कहा कि उसके बाद से वे बंदूक के लिए भटक रहे हैं। लगातार कोतवाली जाते हैं लेकिन पुलिस कर्मी कहते हैं कि आपकी बंदूक ढूंढी जा रही है। उन्होंने डीएम से पूरे प्रकरण की जांच कराकर थाने में जमा बंदूक दिलाए जाने की मांग की है। कहा कि उनकी उम्र 80 साल हो गई है। उसे परिवार के दूसरे सदस्य के नाम करना है।
सीओ से कराई जा रही जांच
यदि ऐसा है तो प्रकरण बेहद गंभीर है। प्रकरण संज्ञान में आते ही सीओ अमेठी को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट मिलते ही दोषी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जमा बंदूक लाइसेंस धारक को मुहैया कराई जाएगी।
डॉ. इलामारन जी., एसपी