गौरीगंज (अमेठी)। अमेठी में जिला कारागार की स्थापना को शासन की मंजूरी मिल गई है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इसके लिए जल्द धनावंटन भी हो जाएगा। अमेठी में बनने वाले इस कारागार की क्षमता 990 कैदियों को रखने की होगी। कारागार की स्थापना होने के बाद लोगों को सुल्तानपुर व रायबरेली की दौड़ नहीं लगानी होगी।
अमेठी जिले का गठन एक जुलाई 2010 को हुआ था। जिले में रायबरेली की तिलोई व सलोन तो सुल्तानपुर की अमेठी, गौरीगंज व मुसाफिरखाना तहसीलों को शामिल किया गया था। हालांकि 2012 में आई सपा सरकार ने सलोन को पुन: रायबरेली में शामिल करते हुए जिले का नाम भी छत्रपति शाहू जी महाराज नगर के बजाय अमेठी कर दिया था।
जिला स्थायी होने के बाद यहां पर जिला कारागार बनाने की कवायद शुरू हुई। कवायद के तहत सैठा रोड स्थित सकरावां गांव में भूमि चिह्नित की गई। 25.688 हेक्टेयर भूमि का चिह्नांकन कार्य पूरा होने के बाद करीब पांच-छह वर्ष पूर्व 24.128 हेक्टेयर भूमि क्रय की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त जेल प्रशासन को 1.9174 हेक्टेयर भूमि ग्राम समाज व तालाब की भी दी गई है। भूमि चिह्नित व क्रय किए जाने के बाद से जिला कारागार की स्थापना को लेकर जिला प्रशासन लगातार शासन से पत्राचार कर रहा था।
पीडब्ल्यूडी भेज चुका डीपीआर
पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के एक्सईएन शैलेंद्र कुमार ने बताया कि निर्माण खंड-2 अयोध्या की ओर से जिला कारागार निर्माण के लिए काफी दिन पूर्व एक अरब 64 करोड़ 45 लाख 22 हजार रुपये का डीपीआर भेजा गया था। यह प्रस्ताव फिलहाल शासन में लंबित है।
मिलेगी ये सुविधा
12 वर्ष पूर्व जिले का गठन होने के बावजूद अभी सुल्तानपुर से अलग कर अमेठी में शामिल तीन तहसीलों के रहने वाले कैदी सुल्तानपुर जिला जेल तो रायबरेली से कटकर आई तिलोई तहसील के कैदी रायबरेली जिला जेल में रखे जाते हैं। इतना ही नहीं इन तहसीलों के थानों से होने वाले सभी चालान पुराने जिलों के न्यायालयों में होते हैं और शांति भंग के अंदेशे में पाबंद होने के बाद जेल जाने वालों को भी वहीं की जेल में रखा जाता है। अमेठी में जेल बनने के बाद कैदियों/बंदियों के परिजनों को उनसे मिलने के लिए दूसरे जिलों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।