अमेठी सिटी। मुसाफिरखाना के दादरा स्थित हिंगलाज मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रविवार को प्रवचन के दौरान जीवन मूल्यों, भक्ति और आत्मचिंतन पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। प्रवाचक अजय शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन का मार्गदर्शक है। भागवत कथा मनुष्य को सही राह दिखाती है।
प्रवाचक ने नारद मुनि के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि त्रिलोक में श्रीमद्भागवत कथा अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है। यह सौभाग्य केवल उन्हीं को प्राप्त होता है, जिनके जीवन में संस्कार और श्रद्धा का संयोग होता है। कथा में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मानव जीवन को मर्यादा, करुणा और कर्तव्य का बोध कराती हैं।
प्रवाचक ने बताया कि मानव जीवन की दिशा निर्धारित करने वाले चार प्रमुख ग्रंथ माने जाते हैं। महाभारत से पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों की सीख मिलती है। रामायण आदर्श जीवन पथ का बोध कराती है। गीता कर्म, वैराग्य और अंत समय के सत्य से परिचित कराती है। श्रीमद्भागवत महापुराण शिष्य और गुरु के संबंधों की गहराई समझाती है। उन्होंने कहा कि जब तक शिष्य पूर्ण समर्पण नहीं करता है तब तक गुरु का ज्ञान अंतःकरण में स्थायी रूप नहीं ले पाता है। कथा के दौरान भक्ति, संयम और सदाचार पर भी चर्चा हुई। इस मौके पर तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे।