अमेठी। आयुष्मान भारत योजना के तहत चिन्हित लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाने की रफ्तार जिले में बेहद सुस्त है। योजना के तहत जिले में चिन्हित एक लाख 32 हजार 856 परिवार के छह लाख 64 हजार 280 लोगों के सापेक्ष अब तक महज एक लाख 33 हजार 443 लोगों का ही गोल्डन कार्ड बन सका है। विभाग की ओर से गांव-गांव कैंप लगाने के बावजूद लाभार्थी कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए भारत सरकार की ओर से संचालित आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का इलाज कराने की व्यवस्था है।
इसके लिए वर्ष 2011 की बीपीएल सूची में दर्ज परिवारों को पात्र मानते हुए जिले में कुल एक लाख 32 हजार 856 परिवार को पात्रता की श्रेणी में चिन्हित करते हुए छह लाख 64 हजार 280 लोगों का गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित हुआ है। आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग की तमाम कवायद के बावजूद अब तक जिले में मात्र एक लाख 33 हजार 443 परिवारों का ही गोल्डन कार्ड बन सका है।
कोविड-19 के चलते जिले में मार्च माह के अंतिम सप्ताह से कार्ड बनाने की प्रक्रिया ठप हो गई थी। कोविड-19 की रफ्तार जिले में सुस्त होने के बाद अब दोबारा इसकी कवायद शुरू करते हुए अब गांव-गांव कैंप आयोजित कर निशुल्क कार्ड बनाए जा रहे हैं बावजूद इसके चयनित लाभार्थी गांव में लगाए गए कैंप तक बुलाने पर भी नहीं आ रहे हैं।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि एएनएम, आशा बहू व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा योजना में चयनित लोगों को गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित करने का काम किया जा रहा है। इसके लिए आरोग्य सेवकों को प्रति ब्लॉक एक दिन में कम से कम 100 कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी वित्तीय वर्ष में जिले में चयनित शत-प्रतिशत लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।