मुसाफिरखाना में रामलीला मंचन करते कलाकार। स्रोत: आयोजक
मुसाफिरखाना। निजामुद्दीनपुर चौराहे पर चल रही रामलीला के छठे दिन शनिवार की रात हनुमान के लंका दहन का मंचन आकर्षण का केंद्र रहा। सीता हरण, शबरी मिलन, राम-सुग्रीव मित्रता और बालि वध के प्रसंगों को भी कलाकारों ने जीवंत किया। लंका दहन के दृश्य पर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयघोष से रामलीला परिसर गुंजायमान कर दिया।
मंचन के दौरान मारीच ने स्वर्ण मृग का रूप धारण किया। माता सीता के आग्रह पर प्रभु श्रीराम उसे पकड़ने के लिए वन में गए। इसी बीच रावण ने छलपूर्वक सीता का हरण कर लिया। उनकी रक्षा के लिए जटायु ने रावण से युद्ध किया, मगर गंभीर रूप से घायल हो गए। सीता की खोज करते हुए श्रीराम की भेंट शबरी से हुई। इसके बाद उनकी सुग्रीव से मित्रता हुई।
श्रीराम ने बालि का वध कर सुग्रीव को उसका राज्य वापस दिलाया। उधर माता सीता की खोज में हनुमान समुद्र लांघकर लंका पहुंचे। अशोक वाटिका में माता सीता को खोजने के बाद उन्होंने उन्हें प्रभु श्रीराम की मुद्रिका देकर उनके आने का संदेश दिया। इसके बाद अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार वध और रावण-हनुमान संवाद का मंचन किया गया। अंत में हनुमान ने अपनी पूंछ में लगी आग से लंका जला दी। इस अवसर पर जोनल जीएसटी आयुक्त भूपेंद्र शुक्ल, राम सजीवन यादव आदि मौजूद रहे।