इन्हौना के अशरफपुर मजरे अंगूरी निवासी एवं उच्च न्यायालय लखनऊ के अधिवक्ता तरुण कुमार ओझा की उपचार के दौरान मौत के बाद मंगलवार देर शाम कमरौली के एक निजी अस्पताल में घंटों हंगामा होता रहा। परिजनों ने उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए शव ले जाने से इनकार कर दिया। सीओ अतुल सिंह और कई थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा। देर रात तक चली वार्ता के बाद अस्पताल संचालक और उनके सहायक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर मामला शांत हुआ।
मृतक के पिता नंद कुमार ओझा की तहरीर पर अस्पताल संचालक डॉ. राज बहादुर यादव और उनके सहायक शैलेन्द्र मौर्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोप है कि 20 जुलाई को बुखार की शिकायत पर तरुण कुमार ओझा को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती रही। परिजनों का कहना है कि प्लेटलेट्स लगातार कम होने के बावजूद समुचित उपचार नहीं दिया गया और गंभीर स्थिति में भी दूसरे अस्पताल नहीं भेजा गया।
मृतक के भतीजे अभिषेक ओझा ने आरोप लगाया कि अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं थी। प्लेटलेट्स की व्यवस्था परिजनों से कराई गई। कई बार दूसरे अस्पताल भेजने का अनुरोध किया गया, मगर मरीज को भर्ती रखा गया। बाद में लखनऊ ले जाने की बात कही गई। इससे नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और रिपोर्ट दर्ज होने तक शव ले जाने से इनकार कर दिया।
करीब कई घंटे तक चली वार्ता के बाद पुलिस ने तहरीर के आधार पर अस्पताल संचालक और उनके सहायक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। इसके बाद परिजन शव लेकर रवाना हुए। सीओ अतुल सिंह ने बताया कि मृतक के पिता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की विवेचना की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।