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Amethi News: घात लगाकर हमला, युवक की मौत, पिता घायल

Wed, 09 Apr 2025 12:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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जायस के तामामऊ गांव में रोते परिजन और दुखी गांव के लोग।-स्रोत ग्रामीण
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अमेठी सिटी। जायस क्षेत्र के तामामऊ गांव में सोमवार रात घात लगाकर आठ लोगों ने गांव के रामशंकर सरोज (58) व उनके बेटे सुनील कुमार (32) पर लाठी, डंडा और कुल्हाड़ी से हमला बोल दिया। इससे पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को एम्स रायबरेली पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान बेटे की मौत हो गई, जबकि पिता की हालत नाजुक बनी हुई है। मामले में मृतक की पत्नी की तहरीर पर आठ नामजद व कई अज्ञात पर केस दर्ज कर पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। गांव में तनाव को देखते हुए फोर्स तैनात की गई है।
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प्रीती देवी के मुताबिक, पुराने विवाद से नाराज गांव के ही हरिश्चंद्र, विजय कुमार, अजय कुमार, सचिन, कंचन, सीमा, भानमती और नीतू ने कुछ अज्ञात लोगों के साथ सोमवार देर शाम बाजार से लौट रहे उनके पति सुनील कुमार पर लाठी, डंडे और कुल्हाड़ी से हमला बोल दिया। चीख-पुकार पर वह ससुर रामशंकर, सास सिरताजा के साथ पति को बचाने पहुंचीं तो उन लोगों की भी पिटाई कर दी। पिटाई में पति व ससुर को गंभीर चोटें आईं।


चीख-पुकार पर गांव के लोग दौड़े तो आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकले। हमले में घायल पति व ससुर को तिलोई रेफरल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने हालत नाजुक देख दोनों को रायबरेली एम्स रेफर कर दिया। एम्स में उपचार के दौरान पति की मौत हो गई, जबकि ससुर की हालत गंभीर बनी हुई है। इंस्पेक्टर रवि कुमार सिंह ने बताया कि केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश में संभावित स्थान पर दबिश दी जा रही है। गांव में एहतियातन फोर्स तैनात की गई है।
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एक साल तक इंतजार करने के बाद किया हमला
ग्रामीणों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि करीब एक साल पहले सुनील का विजय व अजय से विवाद हो गया था। विवाद में सुनील ने दोनों की पिटाई भी की थी। हालांकि, विवाद के बाद सुनील के परदेश जाने से मामला शांत पड़ा रहा। एक साल बाद सुनील गांव आए तो दोनों के मन में दबा प्रतिशोध उग्र हो गया और परिजनों संग मिलकर सुनील की पिटाई कर दी। इसमें सुनील की जान चली गई।




सूरत से सुनील को खींच लाई मौत
सुनील सूरत में रहकर प्राइवेट नौकरी करते थे। तीन दिन पहले ही वह घर आए थे। 26 अप्रैल को वापसी का टिकट था, लेकिन सुनील को शायद इस बात का अंदेशा नहीं था कि इस बार गांव में मौत उनका इंतजार कर रही है। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि पिता ने सुनील को आने से मना भी किया था, लेकिन गेहूं की कटाई में पिता की मदद करने के लिए वह गांव आ गए।



अब कौन बनेगा बुढ़ापे का सहारा
सुनील की मौत के बाद बूढ़ी मां सिरताजा बिलख-बिलख कर रो रही हैं। रोते हुए बुजुर्ग मां के मुंह से बस यही निकल रहा है कि भगवान यह क्या हो गया। अब कौन उनका सहारा बनेगा। भैय्या का मार डालिन। भैय्या अब कबो न मिलिहैं। बुजुर्ग मां की करुणवेदना से हर किसी की आंख नम है। पत्नी प्रीति तो पति की मौत से बेहाल होकर बार-बार बेसुध हो जा रही है। बेटी आंचल और बेटे निखिल व प्रिंस पिता की मौत से अंजान कभी मां व दादी को रोता देख, रोने लगते हैं तो कभी मां को चुप कराते हुए पूछते हैं कि मां क्या हुआ, क्यों रो रही हो। मासूमों के सवालों का जवाब देने के बाद प्रीति बिलख पड़ती हैं। अस्पताल में भर्ती रामलखन को भी अब तक बेटे की मौत होने की जानकारी नहीं दी गई है।
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