ग्रामीण अतुल सिंह व राहुल कौशल के अनुसार मंदिर की स्थापना गांव के ही एक परिवार ने करीब 120 वर्ष पूर्व कराई थी। मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। आरोप है कि 20 वर्ष से एक समुदाय ने मंदिर पर कब्जा करके पूजा रोक दी है। ग्रामीणों के अनुसार मंदिर के पुजारी को प्रताड़ित कर गांव छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। एसडीएम मुसाफिरखाना प्रीती तिवारी ने आरोप को गंभीर मानते हुए जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया। इस दौरान गांव के लवकुश चौरसिया, महंत दुर्गेश दास, रामधनी व अभिषेक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
तहसीलदार को सौंपी जांच
एसडीएम प्रीति तिवारी ने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। तहसीलदार को जांच दी गई है। मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।