जायस। साइबर ठगों ने वाट्सएप कॉल और फर्जी दस्तावेज के सहारे कस्बे के एक युवक से नौ लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
मोहल्ला बड़ा गोरियाना निवासी रिजवान अहमद (32) के अनुसार 19 नवंबर 2025 को वाट्सएप पर अंतरराष्ट्रीय नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने अपना नाम सुलेमान अयूब बताया और आधार कार्ड व यूके आईडी की प्रतियां भेजीं। विश्वास कायम करने के बाद आरोपियों ने परिवार के सदस्य के बैंक खाते का विवरण मांगा। इसके बाद बैंक ऑफ अमेरिका की कथित जमा परची भेजी गई, जिसमें 10 लाख डॉलर जमा होने का उल्लेख था।
रकम को भारतीय मुद्रा में बदलने के नाम पर एसबीआई मुंबई शाखा का फर्जी संपर्क नंबर दिया गया। कहा गया कि मुद्रा बदलने पर उसे ठीकठाक धनराशि दी जाएगी। क्लियरेंस शुल्क के नाम पर पांच हजार रुपये एक यूपीआई आईडी पर सैफ अली नाम से भेजे गए। इसके बाद अलग-अलग बहाने बनाकर क्यूआर कोड साझा किए जाते रहे।
पीड़ित ने परिवार और मित्रों से उधार लेकर भुगतान किया। 19 नवंबर से 10 दिसंबर के बीच कई किस्तों में नौ लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रिजवान को एक परिचित की सतर्कता से ठगी का पता चला। कोतवाली प्रभारी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि एफआईआर दर्ज की गई है। साइबर टीम की मदद से मामले की जांच की जा रही है।
साइबर ठगी से ऐसे बचें
अनजान नंबर से आई कॉल पर निजी जानकारी साझा न करें। विदेशी बैंक जमा परची, लॉटरी या इनाम के संदेशों की सत्यता आधिकारिक स्रोत से जांचें। क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले भुगतान का उद्देश्य समझ लें। किसी भी प्रकार का शुल्क मांगने पर सतर्क रहें। संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें और नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।