जामों। वर्रा गांव में आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन बृहस्पतिवार को प्रवाचक रामसंचित शास्त्री ने कहा कि सत्य और धर्म का मार्ग अंततः विजय दिलाता है। अहंकार पापकर्म की जड़ है, इसलिए मनुष्य को उससे दूर रहना चाहिए। निर्मल मन से भगवान का भजन-कीर्तन और सदाचार का पालन जीवन को सही दिशा देता है।
प्रवाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का श्रेष्ठ उदाहरण है। कहा कि श्रीराम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए राजसिंहासन त्याग दिया, फिर भी कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं हुए। रावण का वध कर उन्होंने धर्म की स्थापना और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
माता सीता के धैर्य और दृढ़ विश्वास का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी परिवार और संस्कारों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर मुख्य यजमान रामकुमार दुबे, शिव सागर, प्रह्लाद, धर्मराज मौर्य, राजेश कुमार, राकेश कुमार आदि मौजूद रहे।