.शाहगढ़ के हरदोइया में श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु।स्रोत-आयोजक
शाहगढ़। कागभुशुंडि केवल एक कौआ नहीं, बल्कि परम भक्त हैं, जो जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर रामभक्ति में लीन हो चुके हैं। यह बातें हरदोइया के करुणा निधान मंदिर परिसर में श्रीराम कथा के पांचवें दिन शनिवार को प्रवाचक सुभाष पांडेय ने कहीं।
उन्होंने कहा कि कौआ के रूप में अमर ऋषि कागभुशुंडि का भगवान राम के बाल स्वरूप को निहारना, उनसे खेलना और उनके जीवन की विभिन्न लीलाओं (जैसे बचपन, राज्याभिषेक, युद्ध) का साक्षी बनना, जिसका वर्णन वे गरुड़ को सुनाते हैं, यह भक्ति और दिव्य दर्शन का अनूठा संगम है।
प्रवाचक ने कहा कि कागभुशुंडि को अहंकार हुआ कि जो रोटी के टुकड़े के लिए रो रहा है, वह कैसा भगवान। इसी सोच में कागभुशुंडि आसमान में उड़ रहे थे तो देखा कि उनके पीछे बालक रूप में श्रीराम भी रोते हुए आ रहे हैं। अंत में वह थककर भगवान के चरणों में गिर पड़े। कहा कि कागभुशुंडि का भ्रम रोटी छीनने से नहीं, बल्कि ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर अहंकार से उत्पन्न हुआ था। इसलिए मनुष्य को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए।
कथा विराम के बाद आरती हुई और प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर शिवमोहन मिश्र, काशी प्रसाद मिश्र, भूपेंद्र शुक्ल, उमेश पांडेय, बसंत तिवारी, चंद्रकांत तिवारी आदि मौजूद रहे।