गौरीगंज (अमेठी)। अमेठी में विकास के लिए आए धन की बंदरबांट का एक और मामला सामने आया है। पंचायती राज विभाग की मिलीभगत से जिले की 44 ग्राम पंचायतें अपने गांव को मॉडल बनाने के लिए आवंटित 17.44 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि को ठिकाने लगाने में जुटी हैं। विकास के लिए आए धन को हजम करने के लिए चहेते ठेकेदारों के मानक विहीन कार्य का भुगतान किया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद विभाग जांच कराने की बात कह रहा है।
प्रदेश के अन्य जिलों की तरह जिले में भी स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 पर काम चल रहा है। इस योजना के तहत जिले की गौरीगंज, संग्रामपुर व शाहगढ़ को छोड़ सभी 10 ब्लॉकों की उन 44 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है जिनकी आबादी पांच हजार या इससे ऊपर है। पहले ही ओडीएफ घोषित इन ग्राम पंचायतों में ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर काम चल रहा है। योजना के तहत इन गांवों में सार्वजनिक स्थलों पर लगे इंडिया मार्क-2 हैंडपंपों के पास सोख्ता गड्ढे बनाए जाने हैं। अंडरग्राउंड नाली निर्माण, खाद गड्ढा, सीमेंट के फिक्स डस्टबिन के साथ ही पहले से बनी नालियों में सिल्ट कैचर व फिल्टर चैंबर बनाया जाना है। कूड़ा ढोने के लिए गांवों को वाहन खरीदने की भी सुविधा दी गई है।
योजना के तहत चयनित ग्राम पंचायतों को स्वच्छता के निर्धारित सभी बिंदुओं पर संतृप्त किया जा सके इसके लिए करीब चार माह पूर्व जिले को 17.44 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। आवंटित राशि ग्राम पंचायतों के खाते में भेजने के बाद उनसे पूर्व निर्धारित कार्ययोजना पर काम शुरू करने को कहा गया था। बताया जा रहा है स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत कराए जा रहे कार्यों में नियमों व मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिम्मेदार पंचायतें स्वयं काम कराने के बजाय पूरा काम ठेकेदारों से करा रही हैं।
ईंट, मौरंग व सीमेंट समेत सभी सामग्रियों की आपूर्ति चहेतों की चुनिंदा फर्मों से ली जा रही है। आरोप है कि यह पूरा खेल विभाग के बड़े अफसरों की जानकारी में चल रहा है। जिन फर्मों से आपूर्ति ली जा रही है व जो ठेकेदार काम कर रहे हैं वे भी सीधे विभागीय अफसरों से जुड़े हैं। बताया जा रहा है कि अब तक पंचायतों द्वारा आधेे अधूरे काम के एवज में करीब पांच करोड़ रुपये (डीपीआरओ के अनुसार ढाई करोड़ रुपये) का भुगतान किया जा चुका है।
पहुंचाया जा रहा व्यक्तिगत लाभ
साफ कहा गया है कि योजना के तहत कराया जाने वाला कोई भी कार्य व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने के लिए नहीं होगा। बावजूद इसके तकरीबन सभी गांवों में अपने चहेतों के हैंडपंपों के पास सोख्ता गड्ढे व उनके घर की नालियां बनाई जा रही हैं। पंचायतों में योजना के तहत कराया जाने वाला कोई भी कार्य मानक के अनुरूप नहीं है।
ऐसे उजागर हुआ मामला
सीडीओ सान्या छाबड़ा ने पिछले दिनों बाजार शुकुल ब्लॉक के महोना पश्चिम गांव का निरीक्षण किया। सीडीओ को गांव में कराए गए सभी कार्य मानक विहीन मिले। गांव वालों ने पूरा काम ठेकेदारी प्रथा से कराए जाने की पुष्टि की। नाराज सीडीओ ने डीपीआरओ को ग्राम प्रधान व सचिव पर प्रशासनिक व वैधानिक कार्रवाई का निर्देश दिया था।
जांच कर होगी कार्रवाई
स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत चयनित ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है। योजना के तहत कार्यों पर रनिंग भुगतान की व्यवस्था है। कुछ गांवों में मानक विहीन काम होने की बात सामने आ रही है। जांच करायी जाएगी। जिन गांवों में गड़बड़ी मिलेगी उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - श्रीकांत यादव, डीपीआरओ अमेठी