अमेठी। स्थानीय विधानसभा क्षेत्र के अमेठी ब्लॉक के अलग-अलग गांव में रहने वाली 40 हजार से अधिक आबादी अंडरपास का निर्माण नहीं होने से परेशानियों का सामना कर रही है। अंडरपास नहीं होने से जहां बाइक व साइकिल सवार जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन क्रास करने को मजबूर हैं वहीं चार पहिया वाहन से आने जाने वालों को एक किलोमीटर की यात्रा तय करने के लिए पांच किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है।
लखनऊ-वाराणसी रेल खंड पर अमेठी और ताला खजुरी रेलवे स्टेशन के बीच स्थित बारामासी मानव रहित रेलवे क्रासिंग स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी है। इस क्रासिंग से नहर की पटरी के किनारे बारामासी बाजार से होकर पिच रोड कोरारी गिरधरशाह तक गयी है। इस मार्ग से करीब डेढ़ सौ गांवों के लोगों के अलावा बाहर के सैकड़ों राहगीर प्रति दिन आते जाते हैं। उक्त रेल खंड पर डबल ट्रैक भी बन चुका है।
ट्रैक ऊंचा होने की वजह से चार पहिया वाहन ट्रैक नहीं पार कर पाते। ऐसे में चार पहिया वाहन से चलने वालों को एक किलोमीटर के अंदर वाले गांवों तक जाने के लिए न्यूनतम पांच किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। इस मार्ग से कई प्राथमिक विद्यालय, दो इंटर कॉलेज, जूनियर हाईस्कूल तथा अन्य स्कूलों के बच्चे जान जोखिम में डालकर आते जाते हैं। तो वहीं बाइक और साइकिल सवार राहगीर जान हथेली पर लेकर रेलवे ट्रैक पार करते हैं। ट्रैक पार करते समय कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं।
स्थानीय लोगों की मांग और चुनावी वर्ष को देखते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार ने दिसंबर 2013 में ट्रैक के पास अंडरपास निर्माण का बोर्ड लगवा दिया था। बोर्ड में अंडरब्रिज निर्माण की लागत एक करोड़ 61 लाख 19 हजार 710 रुपए तथा स्वीकृति तिथि दिसंबर 2013 तथा कार्य पूर्ण करने की अवधि छह माह बताई गई है। सात वर्ष बीतने के बावजूद अंडरपास निर्माण के लिए अब तक कोई पहल नहीं शुरू हुई।
अंडरपास निर्माण को लेकर स्थानीय लोग लगातार धरना प्रदर्शन भी करते रहे हैं। स्थानीय लोगों ने सांसद राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, प्रधानमंत्री, रेल मंत्री सहित तमाम जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन दिया लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
बारामासी निवासी धर्मेंद्र शुक्ला ने बताया कि बीते कई दशक से मानव रहित क्रासिंग पर अंडरपास बनवाए जाने की मांग होती आ रही है। अंडरपास नहीं होने की सर्वाधिक दिक्कत स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है। बच्चे जान जोखिम में डालकर ट्रैक पार करते हैं। पठकापुर के रहने वाले व्यवसायी दीपक शुक्ल ने बताया कि मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर अंडरपास का निर्माण कराया जाना आवश्यक है। अंडरपास नहीं होने से इमरजेंसी के समय एंबुलेंस और चार पहिया वाहन को कई किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है। अंडरपास का निर्माण होने से काफी सहूलियत मिलेगी।
व्यवसाई त्रियुगी नरायण मिश्र ने बताया कि मानव रहित रेलवे क्रासिंग को पार करते समय कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं। क्षेत्र के लोग अरसा पूर्व से अंडरपास की मांग कर रहे हैं। अंडरपास का निर्माण होना जरूरी है। भगवानपुर निवासी आलोक तिवारी कहते हैं कि मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर अंडरपास निर्माण के लिए बोर्ड तो लगाया गया लेकिन सात वर्ष बीत गए अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। ऐसे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिवक्ता गिरीश कुमार तिवारी, व्यवसाई जगन और नन्हे यादव का कहना है कि हम लोग बीते कई वर्षों से जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर अंडरपास बनवाए जाने की मांग करते आ रहे हैं। स्थानीय बाजार होने के चलते प्रतिदिन हजारों लोगों का आना जाना होता है। बावजूद इसके कोई हमारी पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है। अंडरपास निर्माण के बाद हजारों लोगों को समस्या से निजात मिलेगी।